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विश्व क्षयरोग दिवस : जागरूकता व सतर्कता से ही टीबी से बचाव संभव
मेन..
अब कोई भी व्यक्ति टीबी रोगी को ले सकता है गोद
- पिछले साल हुई जांच में मिले थे 1598 टीबी के नए रोगी
संवाद न्यूज एजेंसी
लखीमपुर खीरी। देश को 2025 तक टीबी रोग मुक्त करने के लिए शासन ने एक साल में 1700 मरीजों को गोद लेने की योजना बनाई है। अब कोई भी व्यक्ति टीबी रोगी को गोद ले सकता है। जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि गोद लेने वाले को हर माह रोगी को मूंगफली दाना, भुने चने, सत्तू, गुड़ और न्यूट्रिशियन सप्लीमेंट प्रत्येक माह, छह माह तक एक-एक किलो की मात्रा में उपलब्ध कराना होगा।
टीबी (क्षयरोग) एक घातक संक्रामक रोग है, जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु से होता है। आमतौर पर टीबी फेफड़ों पर हमला करता है। मगर, शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता है। यह हवा के माध्यम से फैलता है। इससे बचाव के लिए हर साल 24 मार्च को विश्व क्षय रोग दिवस मनाया जाता है, जिससे लोगों को जागरूक कर इस रोग से बचाया जा सके। हालांकि समय समय पर अभियान चलने के बावजूद 2021 में 1598 लोगों में टीबी की पुष्टि हुई।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनिल कुमार गुप्ता बताते हैं कि क्षयरोग सुप्त एवं सक्रिय अवस्था में होता है। सुप्त अवस्था में संक्रमण तो होता है, लेकिन टीबी का जीवाणु निष्क्रिय रहता है। इसके लक्षण दिखाई नहीं देते। समय पर इलाज न होने पर सुप्त टीबी सक्रिय में बदल जाती है, जो हानिकारक है। उन्होंने बताया कि टीबी रोगी जब खांसता, छींकता या फिर बोलता है तो उसके साथ संक्रामक ड्रॉपलेट न्यूक्लीआई उत्पन्न होता है, जो कि हवा के माध्यम से दूसरे को भी संक्रमित कर सकता है। ड्रॉपलेट न्यूक्लीआई कई घंटे तक वातावरण में सक्रिय रहते हैं। जब कोई स्वस्थ व्यक्ति हवा में घुले माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस ड्रॉपलेट न्यूक्लीआई के संपर्क में आता है तो वह संक्रमित हो जाता है।
जिले में मिले टीबी रोगी
वर्ष 2020 6282
वर्ष 2021 7880
लक्षण
1. लगातार तीन हफ्ते या उससे अधिक समय से खांसी आना।
2. खांसी के साथ खून का आना।
3. छाती में दर्द एवं सांस का फूलना।
4. वजन का कम होने के साथ थकान ज्यादा लगना।
5. शाम को बुखार आना और ठंड लगना।
6. रात में पसीना आना।
टीबी के प्रकार
1. पल्मोनरी टीबी - टीबी के जीवाणु से फेफड़े संक्रमित होने को पल्मोनरी टीबी कहते हैं। अधिकांशत: जीवाणु फेफड़ों को ही प्रभावित करता है। इसमें सीने में दर्द, लंबे समय तक खांसी व बलगम एवं खून आना।
2. एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी- टीबी जीवाणु के फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित करने को एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी कहते हैं। कई मामलों में संक्रमण फेफड़ों से बाहर फैलकर शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित करता है। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के साथ ही छोटे बच्चों में इसके होने की अधिक आशंका रहती है।
बचाव
1. शिशुओं को बैसिलस कैल्मेट-ग्यूरिन (बीसीजी) का टीका लगवाएं।
2. संबंधित लक्षण लगने पर समय रहते जांच कर इलाज शुरू कराएं। लापरवाही घातक बन सकती है।
3. टीबी संक्रमण की पुष्टि होने पर खांसते समय मुंह पर रुमाल लगाएं। भीड़-भाड़ वाली जगहों पर थूकें नहीं।
4. साफ-सफाई का ध्यान रखकर और जागरूक रहकर टीबी संक्रमण से बचा जा सकता है।
5. मौसमी फल, सब्जी एवं कार्बोहाइड्रेड, प्रोटीन, फैटयुक्त आहार का सेवन कर रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर टीबी रोग से बचा जा सकता है।
जांच के दौरान टीबी यूनिट में संक्रमित
फरधान 278
बिजुआ 376
नकहा 391
बांकेगंज 355
मोहम्मदी 580
बेहजम 362
खीरी टाउन 273
फूलबेहड़ 527
निघासन 601
धौरहरा 473
खमरिया 392
बरबर 171
गोला 389
रमियाबेहड़ 491
पलिया 337
कुंभी 239
पसगवां 380
मितौली 405
टीबी अस्पताल 860
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टीबी रोग का इलाज संभव है। टीबी अस्पताल एवं सीएचसी सहित कुल 19 जगहों पर जांच की सुविधा उपलब्ध है। गंभीर टीबी रोगियों को पोषण के लिए हर माह 500 रुपये भी दिए जाते हैं। टीबी संबंधी लक्षण लगने पर जांच कराएं, जिससे समय रहते इलाज मिलने से रोग से मुक्ति मिल सके।
- डॉ. शैलेंद्र भटनागर, सीएमओ