लखीमपुर खीरी। मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला धीरे-धीरे औपचारिक होता जा रहा है। रविवार को करीब 10 पीएचसी की पड़ताल की गई। इसमें कुछ में मरीजों के खून की जांच की सुविधा नहीं थी। कहीं टेक्नीशियन नहीं मिले तो शेष में मशीन खराब ही पड़ी थी। चिकित्सकों को दिखाने के बाद मरीजों को बाहर से महंगी जांच कराने या फिर अगले दिन जिला अस्पताल में दिखाने के लिए कहकर लाैटा दिया गया।
मरीजों को घर के पास ही एक ही छत के नीचे इलाज, दवा व जांच की सुविधा मिल सके, इसके लिए रविवार को शहर के नगरीय व ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला का आयोजन होता है, जो अब सिर्फ दावों तक सीमित है। इलाज की व्यवस्था यहां ठीक नहीं है।
नौरंगाबाद व गौटेय्याबाग नगरीय स्वास्थ्य केंद्र में पड़ताल की गई तो यहां मरीजों की खून की जांच नहीं हो रही थी। इससे चिकित्सकों को परामर्श के बाद भी मरीजों को बाहर जांच करानी पड़ी या उनसे शहर से 15 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल में जांच के लिए कह दिया गया। कमोबेश जिले की कई अन्य पीएचसी का भी यही हाल रहा।
राजापुर बैनी पीएचसी में मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में 56 मरीज पहुंचे। यहां चिकित्सक, स्टाफ नर्स व स्वीपर सहित तीन लोगों का स्टाफ ही है। वहीं, वार्ड बॉय का तबादला हो जाने से यह जगह रिक्त हैं। रक्त की जांच के लिए भी कोई सुविधा नहीं मिली। इससे मरीजों को मायूस होना पड़ा।
पसगवां में पीएचसी में 83 मरीज को देखकर दवाएं दी गईं। लैब सहायक के अवकाश पर होने के कारण खून, मलेरिया आदि जांच नहीं हो सकी। चिकित्साधिकारी डॉ. रमाकांत वर्मा ने बताया कि बुखार, दस्त, खांसी आदि रोगों के मरीजों का उपचार किया गया है। मेले में फार्मासिस्ट संजीव कुमार, स्टाफ नर्स रवि, आशुतोष शुक्ला मौजूद रहे, जबकि स्टाफ नर्स उज्जवल शुक्ल मौजूद नहीं मिली।
मैगलगंज के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खखरा में आयोजित आरोग्य मेले में 40 मरीज पहुंचे। डॉ. पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि खून की जांच के लिए मशीन है, लेकिन वह खराब पड़ी है।
मितौली क्षेत्र के ककरहा, संडिलवा, कैमहरा, चुरईपुरवा, कल्लुआमोती पीएचसी पर मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला में खून की जांच के लिए किट का उपयोग किया जा रहा है। हालांकि, ककरहा पीएचसी पर ही लैब टेक्नीशियन की तैनाती है। यहां मलेरिया सहित अन्य बीमारियों की जांच हो जाती है।
संपूर्णानगर पीएचसी में मरीज की लैब में जांच करता टेक्नीशियन। संवाद