लखीमपुर खीरी। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। जिले की 15 सीएचसी में से नौ में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती तक नहीं है।
बच्चों की थोड़ी सी भी तबीयत बिगड़ने पर तीमारदारों को उन्हें लेकर जिला अस्पताल का रुख करना पड़ रहा है। इससे उनकी जेब पर बोझ पड़ रहा है, बल्कि लंबा सफर तय करने पर उनका समय भी बर्बाद हो रहा है। गांवों से आने वाले गरीब व दूर-दराज के लोगों के लिए यह बड़ी परेशानी का सबब है। तीमारदारों को अपने बच्चों को लेकर कई किलोमीटर दूर जिला अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ता है। जिला अस्पताल पर पहले से ही भीड़ रहती है और अब सीएचसी से रेफर होकर आने वाले बच्चों के कारण यहां दबाव और बढ़ गया है।
एक तीमारदार ने बताया कि वह अपने बच्चे को बुखार और सांस की तकलीफ की वजह से नजदीकी सीएचसी लेकर पहुंचे थे, लेकिन वहां बाल रोग विशेषज्ञ न होने से उन्हें रेफर कर दिया गया। मजबूरन बच्चे को लेकर जिला अस्पताल आना पड़ा। उन्होंने कहा कि अगर सीएचसी पर ही बच्चों के इलाज की सुविधा होती तो उन्हें इतनी परेशानी न उठानी पड़ती।
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इन सीएचसी पर नहीं बाल रोग विशेषज्ञ
-मितौली, बिजुआ, धौरहरा, खमरिया, फूलबेहड़, पसगवां, फरधान, निघासन, रमियाबेहड़।
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जिला अस्पताल में भी तीन चिकित्सक पर 200 की ओपीडी
जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ के पद पर तीन चिकित्सकों की ड्यूटी लग रही है। यह चिकित्सक प्रतिदिन करीब 150-200 मरीज देख रहे हैं। सीएचसी पर चिकित्सक न होने से मरीजों को जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ रही है या तो प्राइवेट अस्पतालों में जाकर महंगा इलाज करना पड़ रहा है।
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हमारे पास छह बाल रोग विशेषज्ञ हैं, जो सीएचसी पर तैनात हैं। बाल रोग विशेषज्ञों की कमी को लेकर शासन को पत्राचार किया जा चुका है।
-डॉ. संतोष गुप्ता, सीएमओ