मैगलगंज। लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-30 और पीलीभीत-नैनीताल राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-730 पर लगी हाईमास्ट और मरकरी लाइटें लंबे समय से बंद हैं। इससे हाईवे के कई हिस्से रात होते ही अंधेरे में डूब जाते हैं और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अहम बात यह है कि बिजली निगम को इनका बिल भी एनएचएआई की तरफ से दिया जा रहा है।
लखनऊ-दिल्ली हाईवे संख्या-30 पर औरंगाबाद-लखीमपुर मार्ग स्थित ओवरब्रिज पर 50 से अधिक विद्युत खंभे लगाए गए हैं। प्रत्येक खंभे पर दो-दो मरकरी लाइटें स्थापित थीं। स्थानीय लोगों के अनुसार, लाइटें लगने के बाद करीब छह माह तक ही सुचारु रूप से चलीं। इसके बाद अधिकांश लाइटें बंद हो गईं। बिजली आपूर्ति होने के बावजूद प्रकाश व्यवस्था ठप पड़ी है।
पीलीभीत-नैनीताल हाईवे संख्या-730 पर औरंगाबाद-लखीमपुर रोड किनारे दो स्थानों पर लगी हाईमास्ट लाइटें भी लंबे समय से बंद हैं। इससे रात में राहगीरों को आवागमन में दिक्कत होती है। अंधेरे में सड़क पर बैठे पशु दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
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अंधेरे में हुईं कई बड़ी दुर्घटनाएं
-16 नवंबर, 2025 को सिंगरौली निवासी राजेश्वरी पटेल रात में सड़क किनारे खड़े ट्रक से टकरा गए, जिससे उनकी मौके पर मौत हो गई।
-2 जून, 2026 को पीलीभीत-नैनीताल हाईवे पर खराब खड़े ट्रक से कोयला उतार रहे रहजनिया गांव के दो मजदूरों को एक अनियंत्रित कार ने टक्कर मार दी, जिससे दोनों की मौके पर मौत हो गई।
-7 नवंबर, 2025 को बेहड़ा अजीतपुर निवासी शिवम कुमार मैगलगंज बाइपास पर अज्ञात वाहन की टक्कर से मौत का शिकार हो गए। परिजन और स्थानीय लोग अंधेरे को भी दुर्घटना की एक वजह मानते हैं।
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हाईवे के विद्युत खंभों पर नियमित बिजली आपूर्ति हो रही है और मैगलगंज टोल प्लाजा की ओर से बिजली बिल का भुगतान भी किया जा रहा है। -राजू सागर, जेई, विद्युत निगम, मैगलगंज
हाईवे पर अंधेरा होने से पशु दिखाई नहीं देते, जिससे आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
-अवनीश शुक्ला, होटल व्यापारी
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अंधेरे की वजह से राहगीरों में असुरक्षा की भावना रहती है। हाईवे पर रोशनी होने से अपराध और हादसे दोनों कम होंगे।
-हंसराम राठौर, मैगलगंज
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दिल्ली हाईवे पर पहले आरसीएल कंपनी ने लाइटें लगाई थीं, जो अधिक बिजली खपत करती थीं और जल्दी खराब हो जाती थीं। अब उन्हें एलईडी लाइटों से बदला जा रहा है। बरेली क्षेत्र में काम शुरू हो चुका है। जल्द ही प्रकाश व्यवस्था बेहतर हो जाएगी।
-दीपक कुमार, डिप्टी मैनेजर, एनएचएआई
अवनीश शुक्ला
अवनीश शुक्ला
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