लखीमपुर खीरी। शहर के मध्य में मां शीतला देवी के रूप में आदि शक्ति मां महागौरी विराजमान हैं। शीतला देवी मंदिर भी संकटा देवी मंदिर की तरह ही अति प्राचीन और सिद्धपीठ है। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित देवी प्रतिमा की स्थापना महाभारत काल में हुई थी। यह मंदिर तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र है। शारदीय और वासंतिक नवरात्र में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है।
हिमालय का यह तराई क्षेत्र शिव और शक्ति की उपासना का प्रमुख केंद्र रहा है। यही कारण है कि खीरी जिले में कई पौराणिक शिव मंदिर हैं तो आदिशक्ति के कई प्राचीन मंदिर भी हैं। शहर के बीच गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा के निकट शीतला देवी का प्राचीन मंदिर है। मंदिर के गर्भ गृह में स्थापित देवी की प्राचीन प्रतिमा मां महागौरी के रूप में पूजित है।
इस प्रतिमा की स्थापना कब और किसने की, इसका कोई प्रमाणिक उल्लेख नहीं मिलता लेकिन लोक मान्यता है कि महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने संकटा देवी के साथ ही शीतला देवी के रूप में देवी महागौरी की पाषाण प्रतिमा स्थापित की थी। लोक मान्यता यह भी है कि महाभारत काल में राजा वेन के यहां कन्या रूप में जन्म लेने वाली सात देवियों में से मां महागौरी स्वरूप वाली कन्या शीतला देवी यहां स्थापित हुईं।
कभी चारों ओर जंगल हुआ करता था यहां
बताते हैं कि जिस समय शीतला देवी यहां स्थापित हुईं, उस समय यहां घना जंगल हुआ करता था। सैकड़ों साल पहले जंगल कटकर जब यहां आबादी बसनी शुरू हुई तभी यह दिव्य प्रतिमा प्रकट हुई। धीरे-धीरे यह देवी स्थान तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र बन गया। आज भी शारदीय और वासंतिक नवरात्र के अलावा वर्ष में दो बार होने वाली गुप्त नवरात्र में यहां जनसामान्य के अलावा तंत्र साधक जुटते हैं। चेचक, खसरा जैसी विभिन्न बीमारियों और महामारी आदि से बचाव के लिए लोग मां शीतला देवी की आराधना और अनुष्ठान करते हैं। भक्तों का विश्वास है मां शीतला देवी की आराधना से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है. शरीर स्वस्थ और निरोगी रहता है।
पहले मठिया के रूप में था... अब भव्य मंदिर - मंदिर निर्माण की निश्चित तिथि का कोई उल्लेख नहीं मिलता है लेकिन लोक मान्यता के अनुसार उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभ (1803 ई.) में यह एक छोटी सी मठिया के रूप में था। मौजूदा समय में यहां भव्य मंदिर है। मंदिर लखौरी ईंटों से निर्मित है। मंदिर के आगे बरामदा और चारों ओर प्रदक्षिणा पथ है। मंदिर के गर्भगृह की ऊंचाई लगभग 35 फीट है। प्रदक्षिणा पथ में दसविद्या प्रतिमाओं की स्थापना की गई है। मंदिर में इन दिनों भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है।