लखीमपुर खीरी। पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास सबसे अहम होता है, लेकिन जब यह विश्वास एक मानसिक बीमारी की चपेट में आ जाए तो रिश्ता सिर्फ तनाव नहीं, बल्कि टूटने की कगार पर पहुंच सकता है। बीते कुछ समय से ‘बेवफाई का भ्रम’ (ओथेलो सिंड्रोम) जिसे रोगग्रस्त ईर्ष्या भी कहते हैं, तेजी से उभर रही है। इस बीमारी में एक साथी बिना किसी ठोस वजह के दूसरे पर शक करता है कि वह बेवफाई कर रहा है।
जिला अस्पताल की मानसिक रोग इकाई में प्रतिदिन करीब तीन से चार मरीज इस तरह के सामने आ रहे हैं। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश शुक्ला ने बताया कि इस बीमारी को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी है। कई लोगों को पता ही नहीं है कि यह एक बीमारी है, जबकि यह सिर्फ विवाह तक सीमित नहीं है, बल्कि लिव-इन या प्रेम संबंधों में भी इसे देखा जा रहा है।
कुछ मामलों में तो घर टूटने की नौबत भी आ चुकी है, जबकि कई बार पुरुष आक्रामक होकर पत्नी या प्रेमिका की हत्या भी कर देते हैं। डॉ. अखिलेश शुक्ला ने बताया कि रोजाना 100 मरीजों में करीब चार से पांच मरीज ऐसे आ रहे हैं, जिनको भ्रम है कि उनका जीवनसाथी किसी और से प्रेम संबंध में है, जबकि जांच में ऐसे कोई प्रमाण नहीं मिले। (संवाद)
केस-एक
बीते दिनों थाना खीरी क्षेत्र के अंतर्गत एक युवक ने अपनी 20 वर्षीय मंगेतर की हत्या कर दी। प्रथम दृष्टया यह बात सामने आई है कि युवक ने अपनी मंगेतर की हत्या इसलिए की, क्योंकि उसे शक था कि वह किसी और से बात करती है।
केस- दो
निघासन क्षेत्र के एक गांव से आई एक महिला ने बताया कि उसका 35 वर्षीय पति उस पर बेवजह शक करता है। इससे घरेलू कलह बढ़ रही थी। डॉक्टर को दिखाया तब पता चला कि यह एक बीमारी है। अब पति का इलाज जिला अस्पताल में जारी है।
बेवफाई के भ्रम के लक्षण
-बिना किसी सबूत के अपने साथी की बेवफाई के बारे में विश्वास।
-साथी के प्रति आक्रामक व्यवहार।
-आत्मघाती या हत्या के विचार, खासकर जब भ्रम ईर्ष्या से संबंधित हो।
-सामाजिक अलगाव, क्योंकि व्यक्ति अपने साथी पर विश्वास नहीं करता है और दूसरों से भी दूर रहता है।
-महिला साथी के पिता-भाई या पुरुष साथी के मां या बहन तक के रिश्ते पर गलत संबंध को लेकर शक करना।
लक्षण दिखने पर क्या करें
मनोरोग चिकित्सकों के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति बिना कारण बार-बार शक करने लगे, बहुत अधिक असुरक्षित महसूस करे या बात-बात पर हिंसा या रोष दिखाए तो परिवार को उसे समझाकर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेने के लिए प्रेरित करना चाहिए। दवाइयों से इस बीमारी को दूर किया जा सकता है।