लखीमपुर खीरी में हिंसा व तनाव खत्म करने में एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने अहम भूमिका निभाई, लेकिन बहराइच जिले में जब मृत किसान के परिजन आक्रोशित हुए तो उनको मनाने के लिए एडीजी गोरखपुर से लेकर एसपी तक के प्रयास काम नहीं आए। आखिरकार शाम को दोबारा पोस्टमार्टम कराने की बात पर सहमति बनी और लखनऊ से मेडिकल टीम को पोस्टमार्टम के लिए बुलाया गया जो देर शाम हेलीकॉप्टर से बहराइच पहुंच गई। हालांकि, अभी तक पोस्टमार्टम शुरू नहीं कराया गया है।
लखीमपुर खीरी में हिंसा के दौरान मटेरा थाना क्षेत्र के मोहरनिया गांव निवासी किसान गुरुविंदर सिंह की मौत हो गई थी। शव रविवार देर शाम आवास पहुंचा। सोमवार को अंतिम संस्कार होना तय हुआ, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट परिजनों को नहीं मिली जिससे परिजन नाराज हो गए और अंतिम संस्कार न करने का एलान कर दिया।
यह सुनते ही डीएम डॉ. दिनेश चंद्र व एसपी सुजाता सिंह पहुंच गईं। कुछ देर बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई, लेकिन परिजन पोस्टमार्टम रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुए और दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की। सभी का कहना है कि किसान की मौत सिर में गोली लगने से हुई है जबकि रिपोर्ट में इसका हवाला ही नहीं है।
यह सुन अधिकारियों में बेचैनी फैल गई और मान-मनौव्वल का प्रयास शुरू किया गया। एसपी नाकाम रहीं तो उन्होंने सूचना अपने आलाधिकारियों के साथ शासन को दी। शासन ने गोंडा से आईजी डॉ. राकेश सिंह व गोरखपुर से एडीजी अखिल कुमार को रवाना किया। दोपहर तक देवीपाटन मंडल के आईजी मृत किसान के आवास पहुंचे और उनको समझाने के लिए हर जतन कर डाला, लेकिन परिजन दोबारा पोस्टमार्टम की मांग पर अड़े रहे।