लखीमपुर खीरी। जिले में कई विभाग बिना अधिकारी के चल रहे हैं। उन विभागों की जिम्मेदारी अन्य अफसरों के पास है। प्रभारी अफसरों के पास मुख्य विभाग का ही इतना काम रहता है कि वह अतिरिक्त काम को समय ही नहीं दे पाते। एक समय में दो-दो विभागों की जिम्मेदारी संभालना अफसरों के लिए सिर दर्द है, लेकिन सरकारी सिस्टम के चलते वे कुछ बोल नहीं पा रहे।
जिले में एक नहीं, बल्कि आठ से 10 ऐसे विभाग हैं, जिनमें स्थायी अधिकारी नहीं है। जिला मत्स्य विभाग का चार्ज डीडी मत्स्य लखनऊ के पास है। विभाग में मछली पालन, तालाब पट्टा जैसी कई योजनाएं संचालित हैं। प्रचार-प्रसार तो कर्मचारी कर देते हैं, लेकिन बिल, वेतन, पत्राचार से संबंधित काम प्रभावित होने लगते हैं। इन दिनों विभाग में भुगतान सहित कई काम लंबित हैं।
जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) का चार्ज पूर्ति विभाग की आरओ संगीता सिंह के पास है। उनके पास खुद का इतना काम रहता है कि वह डूडा में काफी कम ही समय दे पाती हैं, जबकि डूडा में शहरी आवास व निर्माण से संबंधित काम होते हैं, जो सीधे जनता से जुड़े हैं। दोनों विभागों की जिम्मेदारी एक साथ संभालना चुनौती से कम नहीं है। अधिकारी के साथ ही कर्मचारी भी परेशान होते हैं।
ग्रामीण अभियंत्रण (आरईएस) के अधिशासी अभियंता हेमंत सक्सेना प्रयागराज के अधीक्षण अभियंता भी हैं। अधिकांश समय वे प्रयागराज रहते हैं। ऐसे में कभी-कभी आरईएस के काम बिना उनके हस्ताक्षर फंस जाते हैं। बिल भुगतान सहित कई कार्य उनके बिना अटके हैं। जिला कृषि रक्षा विभाग का चार्ज जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह के पास है। कृषि अधिकारी के पास पहले ही काम का बोझ है, ऊपर से पीपीओ का चार्ज संभालना चुनौती से कम नहीं है। दोनों विभाग दूर-दूर हैं।
कृषि विभाग विकास भवन में है, जबकि पीपीओ विभाग छाउछ चौराहे पर स्थित डीडी कार्यालय में है। रक्षा विभाग के पास खुद का अधिकारी न होने से काम प्रभावित है। जैसे कीटनाशक दुकानों का निरीक्षण, फसलों की बीमारियों व कीटों से बचाव की योजना ठीक से नहीं हो रही। जिला समाज कल्याण (विकास) विभाग का चार्ज जिला समाज कल्याण अधिकारी वंदना सिंह के पास है। एक समय में दो विभागों की जिम्मेदारी उन्हें संभालना पड़ रही है। विकास खंड मितौली व विकास खंड बेहजम का चार्ज भी जिलास्तरीय अधिकारियों के पास है। इसी तरह जिला दिव्यांगजन एवं सशक्तीकरण का चार्ज पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी अभय कुमार सागर पर है।
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कर्मचारी भी होते हैं परेशान
खुद के अधिकारी न होने पर कर्मचारी भी काफी परेशान होते हैं। उन्हें जरूरी कार्यों के लिए काफी भाग-दौड़ करनी पड़ती है। विभाग में कोई नया आदेश आता है तो उस पर हस्ताक्षर करने के लिए प्रभारी अधिकारी का इंतजार करना पड़ता है या फिर अधिकारी के विभाग के चक्कर लगाने होते हैं।
पिछड़ा व दिव्यांग विभाग के मंत्री व प्रमुख सचिव एक ही हैं। ऐसे में दोनों विभागों की जिम्मेदारी शासनस्तर से ही तय है। दोनों विभाग विकास भवन में है। ऐसे में कोई दिक्कतें नहीं होती है और न ही काम प्रभावित होता है।
-अभय कुमार सागर, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी
एक साथ दो विभागों की जिम्मेदारी संभालना चुनौती तो है, लेकिन फिर काम को बेहतर करने का प्रयास रहता है। एक ही समय में दो विभागों के काम के चलते भाग-दौड़ बढ़ जाती है।
-सूर्य प्रताप सिंह, जिला कृषि अधिकारी