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खीरी के बच्चों पर छाई कुपोषण की काली छाया

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लखीमपुर खीरी। राष्ट्रीय पोषण माह एक से 30 सितंबर तक मनाया जाएगा, जिसके लिए शासन ने कुपोषण छोड़ पोषण की ओर, थामें क्षेत्रीय भोजन की डोर टैगलाइन बनाई है। महीने भर विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए लोगों को पोषण के प्रति जागरूक किया जाएगा। खीरी में जीरो से पांच वर्ष तक के 1185 बच्चों पर कुपोषण की काली छाया का प्रभाव है, जिन्हें एनआरसी (कुपोषण वार्ड) में भर्ती कराने के निर्देश सभी सीडीपीओ को दिए गए हैं। जबकि 14036 बच्चे भी मध्यम रूप से तीव्र कुपोषण की चपेट में हैं।
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पोषण माह मनाने का मुख्य उद्देश्य बेहतर स्वास्थ्य के लिए पोषण के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ाना है, जिसका विकास, उत्पादकता, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय विकास पर प्रभाव पड़ता है। इस अवधि के दौरान बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा और उनकी बेहतरी में उचित पोषण के महत्व के बारे में जन जागरूकता पैदा करने के लिए एक महीने का अभियान चलाया जाएगा।
शासन ने प्रथम सप्ताह में पोषण वाटिका की स्थापना एवं पौधरोपण कराने के निर्देश दिए हैं, जबकि दूसरे सप्ताह में सुपोषण के लिए योग एवं आयुष के महत्व को बताया जाएगा। तीसरे सप्ताह में स्थानीय खाद्य पदार्थों पर जन जागरूकता एवं अनुपूरक पोषाहार का वितरण के विषय पर चर्चा होगी। चौथे सप्ताह में सैम (गंभीर तीव्र कुपोषित) एवं मैम (मध्यम तीव्र कुपोषित) बच्चों का चिह्नांकन करने के साथ ही पौष्टिक भोजन के लिए जागरूक किया जाएगा।
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वर्तमान में जीरो से पांच वर्ष उम्र के बच्चों की कुल संख्या 3,88,373 है, जिसके सापेक्ष 3,53,369 बच्चों का लंबाई/ऊंचाई के आधार पर वजन लिया गया है। इसमें 3,06,873 बच्चे सामान्य मिले हैं, जबकि 35,994 बच्चे मध्यम अल्प वजन और 10,502 बच्चे गंभीर अल्प वजन पाए गए। इनमें से 14,036 बच्चे मैम श्रेणी (मध्यम तीव्र कुपोषित) और 1185 बच्चे सैम (गंभीर तीव्र कुपोषित) श्रेणी के हैं। सैम श्रेणी के बच्चों को तुरंत इलाज की आवश्यकता को देखते हुए जून 2021 में इन्हें जिला अस्पताल स्थित एनआरसी (कुपोषण वार्ड) में भर्ती कराने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन बाल विकास परियोजना पलिया, फूलबेहड़, बिजुआ और रमियाबेहड़ से अभी तक एक भी सैम बच्चे को एनआरसी में भर्ती नहीं कराया गया है। जबकि पलिया में 65, फूलबेहड़ में 86, बिजुआ में 71 और रमियाबेहड़ में 115 सैम श्रेणी के बच्चे हैं।
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कुपोषण से शारीरिक व मानसिक दिव्यांगता के शिकार हो रहे बच्चे
कुपोषण की समस्या दशकों पुरानी है, जिसकी चपेट में आने से बच्चे मानसिक व शारीरिक दिव्यांगता का शिकार बन रहे हैं। करीब दो माह पहले कराए गए सर्वे में जीरो से पांच वर्ष उम्र के 154 बच्चे शारीरिक दिव्यांग मिले हैं, जबकि 73 बच्चे मानसिक रूप से दिव्यांग मिले हैं।
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पोषण माह 30 सितंबर तक मनाया जाएगा, जिसके लिए शासन से विस्तृत कार्ययोजना मिली है। ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यक्रम कराए जाएंगे, जिसके लिए सभी सीडीपीओ समेत संबंधित विभागों को निर्देश जारी किए गए हैं। सैम श्रेणी के बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराया जाना है। चार ब्लॉकों पलिया, फूलबेहड़, बिजुआ और रमियाबेहड़ के एक भी बच्चे को भर्ती न कराए जाने के कारण संबंधित सीडीपीओ को नोटिस जारी कर चेतावनी दी गई है।
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-सुनील कुमार श्रीवास्तव, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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