लखीमपुर खीरी। वीरता, स्वाभिमान और त्याग के प्रतीक महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती शनिवार को जिले भर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। विभिन्न स्थानों पर गोष्ठियां, माल्यार्पण और विचार कार्यक्रम आयोजित कर उनके संघर्ष, शौर्य और राष्ट्रभक्ति को याद किया गया।
पलियाकलां के जिला पंचायत बालिका इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानाचार्य कृष्ण अवतार भाटी ने कहा कि महाराणा प्रताप त्याग और शौर्य की प्रतिमूर्ति थे। प्रवक्ता अर्चना शुक्ला ने महाराणा प्रताप के संघर्ष की गाथा सुनाते हुए बताया कि उन्होंने अरावली की घाटियों में रहकर कठिन परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी। भामाशाह के सहयोग से सेना का पुनर्गठन कर 1582 के दिवेर युद्ध में मुगलों को पराजित किया। इस दौरान प्रियंका चौरसिया, रचना मिश्रा, सुमन गुप्ता सहित विद्यालय की छात्राएं और शिक्षिकाएं मौजूद रहीं।
मोहम्मदी के शुक्लापुर में महाराणा प्रताप सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह, नगरपालिका अध्यक्ष संदीप महरोत्रा, अतुल रस्तोगी, मनोज गुप्ता, कुलदीप सिंह, शुभेंदु प्रताप सिंह, आशीष सिंह, अमित भसीन, देवेश प्रताप सिंह, धर्मेंद्र सिंह, जगमोहन सिंह, प्रवीण कुमार सिंह, प्रवेश सिंह, सुशील वर्मा और कमलेश वर्मा समेत कई लोग मौजूद रहे।
गोला गोकर्णनाथ के कृषि संस्थान सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नगर पालिकाध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू, विशिष्ट अतिथि नगर अध्यक्ष विनोद स्वर्णकार और पूर्व सैनिक राजेश्वर सिंह ने महाराणा प्रताप के चित्र पर पुष्पमाला अर्पित कर उनके शौर्य को नमन किया। इस दौरान विमलेश मिश्र, सुनील वाजपेई, श्रीप्रकाश सिंह, जितेंद्र सिंह और विनीत भदौरिया ने महाराणा प्रताप के जीवन, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति पर विचार व्यक्त किए।
महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह व अन्य। स्रोत : सोशल म