मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण के बीच बसपा के कैडर वोटों ने दिया भाजपा को सहारा
किसान आंदोलन, तिकुनिया हिंसा कांड और महंगाई के मुद्दों का नहीं दिखा असर
लखीमपुर खीरी। जिले की आठों सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों की जीत ने सारे पूर्वानुमानों को ध्वस्त कर दिया। इसी के साथ ही जीत-हार को लेकर चल रहे दावों और कयासों पर भी विराम लग गया। न तिकुनिया हिंसा का असर दिखा न किसानों के मुद्दे प्रभावी रहे। महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को मतदाताओं ने दरकिनार कर दिया।
कोरोना काल से लेकर अब तक गरीबों को बांटे जा रहे मुफ्त राशन, तेल नमक का मतदाताओं ने एहसान अदा किया। चुनाव में जातिवादी राजनीति भी हावी रही, लेकिन विकास के मुद्दों को बल मिला। एंटी इनकंबेसी के चलते लोगों में सत्तारूढ़ भाजपा से नाराजगी थी, लेकिन मतदान करने समय वोटरों ने तुलनात्मक आकलन कर वोटिंग की। सभी सीटों पर मुस्लिम वोटों का सपा के पक्ष में ध्रुवीकरण हुआ तो भाजपा को दलित वोटों का सहारा मिला। बसपा ने इस बार कहीं भी मजबूत दावेदारी नहीं की थी। इसका फायदा भी भाजपा को मिला। 2017 के चुनाव में भाजपा के पक्ष में लहर थी लेकिन इस बार लहर जैसा कुछ नहीं था फिर भी परिणाम लहर की तरह ही आए हैं।
पलिया में रोमी साहनी ने लगातार तीसरी बार जीतकर लगाई हैट्रिक
लखीमपुर खीरी। पलिया में भाजपा विधायक रोमी साहनी ने लगातार तीसरी बार जीतकर हैट्रिक लगाई है। 2012 में वह बसपा, जबकि 2017 और 2022 में उन्होंने भाजपा से लगातार जीत हासिल की है। इस बार उनकी सीधी-सीधी टक्कर सपा के प्रीतइंदर सिंह काकू से थी, जिन्हें उन्होंने 38,129 वोटों से हरा दिया।
पिछले चुनाव में रोमी साहनी ने 69,228 वोटों से जिले में सबसे बड़ी जीत हासिल की थी। रोमी साहनी को इस बार 1,18,864 और प्रीतइंदर सिंह काकू को 80,735 मत मिले, जबकि बसपा के जाकिर हुसैन को 27,849 वोट मिले।
मतगणना के दौरान रोमी साहनी शुरुआती आठ राउंड तक सपा से पीछे रहे, जबकि दोपहर बाद मतगणना की साफ हुई तस्वीर के बाद धीरे-धीरे उन्होंने बढ़त बना ली और लगातार तीसरी बार जीतकर हैट्रिक लगाई। पलिया में सपा ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी, जिससे शुरुआत में सहमे नजर आए रोमी साहनी जीत के बाद खिलखिला उठे।
जातीय समीकरणों के गणित से यहां मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण सपा की ओर रहा, जबकि थारु समुदाय का वोट भी भाजपा की बजाय सपा के पाले में गया। उधर, तिकुनिया हिंसा का असर यहां जरूर दिखाई दिया, जिससे सिख वोट भी भाजपा के पाले से खिसका। बसपा यहां मजबूती से चुनाव नहीं लड़ पाई, जिससे दलित वोटों का रुझान भाजपा की तरफ होने से उसे मजबूती मिली। एंटी इनकंबेसी के असर के बावजूद भी भाजपा से रोमी साहनी समाजवादी पार्टी को शिकस्त देकर हैट्रिक बनाने में कामयाब रहे। पिछले चुनाव में भाजपा के हरमिंदर सिंह उर्फ रोमी साहनी को 118069 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के सैफ अली नकवी को 48841 वोट मिले थे।
विधायक रोमी साहनी ने अपनी जीत का श्रेय क्षेत्र की जनता को दिया है। उधर, हारे सपा के हारे प्रत्याशी प्रीतइंदर सिंह काकू ने बताया कि उन्होंने अच्छी लड़ाई लड़ी। हार-जीत जनता का फैसला है।
2017 का चुनाव परिणाम
रोमी साहनी (भाजपा) 118069
सैफ अली नकवी (कांग्रेस) 48841
डॉ. वीके अग्रवाल (बसपा) 43436
जीत का अंतर 69228
ध्रुवीकरण व बसपा के कैडर वोट में सेंध लगाकर भाजपा के विनोद शंकर जीते
लखीमपुर खीरी। धौरहरा विधानसभा सीट पर भाजपा के विनोद शंकर अवस्थी ने 24,160 वोटों से सपा के वरुण सिंह चौधरी को हराया है। भाजपा के विनोद अवस्थी को 1,13,498 तो सपा के वरुण सिंह चौधरी को 88,888 वोट मिले हैं, जबकि बसपा के आनंद मोहन त्रिवेदी ने 16,122 वोट हासिल कर तीसरे नंबर पर रहे हैं।
धौरहरा विधानसभा सीट पर इस बार तकरीबन सभी उम्मीदवार नए होने के कारण सभी की निगाहें यहां लगी थीं। यहां जातीय समीकरण पूरी तरह उलझे नजर आ रहे थे। भाजपा के पूर्व विधायक बाला प्रसाद अवस्थी ने ऐन चुनाव के पहले भाजपा से पल्ला झाड़ लिया था। उधर, बसपा के पूर्व विधायक शमशेर बहादुर सिंह हाथी की सवारी छोड़ साइकिल पर सवार हो गए थे। माना जा रहा था कि इससे सपा मजबूत होगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण सपा की ओर हुआ तो दलित और ब्राह्मण वोटों के भाजपा के पक्ष में जाने से भाजपा को मजबूती मिली। उधर, पुराने भाजपाई और बसपा प्रत्याशी का कहना है कि चुनाव के लिये 17 दिन का समय मिला, जिससे ब्राह्मण व बसपा का कैडर वोट उनके पक्ष में नहीं गया और भाजपा को मजबूती मिली, जबकि सपा को पूरा मुस्लिम वोट गया। पिछले चुनाव में यहां भाजपा के बाला प्रसाद अवस्थी 79683, जबकि दूसरे नंबर पर रहे सपा के मरहूम यशपाल चौधरी को 76214 वोट मिले थे। बसपा के शमशेर बहादुर तीसरे स्थान पर रहे थे।
जीत के बाद भाजपा प्रत्याशी विनोद शंकर अवस्थी ने जीत का श्रेय क्षेत्र की जनता और कार्यकर्ताओं को दिया है। वहीं सपा प्रत्याशी वरुण सिंह चौधरी ने बताया कि जनता का जो फैसला है, स्वीकार है।
2017 के चुनाव परिणाम
बाला प्रसाद अवस्थी (भाजपा) 79683
यशपाल चौधरी (सपा) 76214
शमशेर बहादुर सिंह (बसपा) 54634
जीत का अंतर 3469
निघासन में जातीय समीकरण रहे हावी, शशांक वर्मा की हुई सबसे बड़ी जीत
लखीमपुर खीरी। विधानसभा क्षेत्र निघासन में तिकुनिया हिंसा का तो कोई असर नहीं दिखा, लेकिन जातीय गणित ने यहां खेल दिखाते हुए एक बार फिर से कमल खिला दिया। पिता रामकुमार वर्मा के निधन के बाद उपचुनाव में जीते शशांक वर्मा ने इस बार सबसे बड़ी जीत हासिल की है। शशांक वर्मा ने 1,26,488 वोट पाकर सपा के आरएस कुशवाहा को 41 हजार से भी ज्यादा वोटों से हराकर जिले में सबसे बड़ी जीत हासिल की है। आरएस कुशवाहा को 85,479 वोट हासिल हुए हैं। जबकि, तीसरे नंबर पर रहे बसपा के आरए उस्मानी को 15,392 वोट मिले हैं।
निघासन में इस बार पिछले चुनाव के मुकाबले 1.91 फीसदी अधिक वोटिंग हुई, जिससे यहां जीत भाजपा के पक्ष में गई। पिछले साल यहां 67.52 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, जबकि इस बार 69.43 फीसदी वोटिंग हुई है। इससे साफ है कि यहां पर तिकुनिया कांड का कोई असर नहीं दिखा। उधर, जातीय गणित ने भी असर दिखाया। मौर्य बिरादरी ज्यादा होने की वजह से बसपा छोड़कर सपा में आए एस कुशवाहा सपा ने प्रत्याशी बनाया, लेकिन जिले में उनकी सबसे बड़ी हार हुई। स्वामी प्रसाद मौर्य की रैली के बावजूद मौर्य बिरादरी का वोट नहीं मिला। हालांकि, मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण सपा के पक्ष में रहा, लेकिन कुर्मी, सवर्ण और दलित वोटों ने भाजपा को मजबूती दी, जिससे भाजपा को शानदार जीत हासिल की। 2017 के चुनाव में यहां से भाजपा के रामकुमार वर्मा को 107487 और दूसरे नंबर पर रहे सपा के कृष्ण गोपाल पटेल को 61334 वोट मिले थे।
भाजपा के जीते प्रत्याशी शशांक वर्मा ने जीत का श्रेय क्षेत्रीय जनता को दिया, वहीं तिकुनिया हिंसा का कोई असर न होने की बात कही। उन्होंने दावा किया कि फिर से क्षेत्र में विकास होगा, जबकि चुनाव परिणाम से मायूस सपा प्रत्याशी आरएस कुशवाहा परिणाम आने से पहले ही मतगणना स्थल से रवाना हो गए। हालांकि चुनाव नतीजों पर उन्होंने इंतजार करने की बात कही।
2017 का चुनाव परिणाम
राम कुमार वर्मा (भाजपा) 107487
कृष्ण गोपाल पटेल (सपा) 61364
जीएस सिंह (बसपा) 40674
जीत का अंतर 46123
सवर्ण वोटों के सहारे भाजपा के सौरभ सिंह की वैतरणी हुई पार
लखीमपुर खीरी। कस्ता (सु) विधानसभा क्षेत्र में मुख्य रूप से पिछली बार की तरह ही इस बार भी भाजपा और सपा के बीच ही कड़ा मुकाबला रहा। भाजपा के सौरभ सिंह सोनू ने 1,03,315 वोट पाकर प्रतिद्वंद्वी रहे सपा के सुनील कुमार लाला को 13,817 वोटों से हरा दिया, जबकि सुनील लाला को 89,498 वोट मिले। उधर, बसपा की हेमवती राज को 16,344 वोट मिले।
कस्ता विधानसभा में मतदान प्रतिशत में भी इस बार मामूली कमी देखी गई। पिछली बार यहां जहां 70.03 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, वहीं इस बार 0.71 फीसदी कम वोटिंग हुई है। अन्य विधानसभा सीटों की तरह यहां भी मुस्लिम वोट एकतरफा सपा को मिले, दलित वोटों में बंटवारा हुआ। वहीं सवर्ण वोटों ने भाजपा के सौरभ सिंह सोनू की वैतरणी पार लगाई।
पिछड़ा वर्ग के वोटों में इस बार बंटवारा देखने को मिला। पिछले चुनाव में यहां से जीते भाजपा के सौरभ सिंह सोनू को 92824 वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे सपा के सुनील कुमार लाला को 68551 वोट मिले थे। भाजपा विधायक सौरभ सिंह ने अपनी जीत का श्रेय क्षेत्र की जनता व सूबे के मुखिया योगी सहित समस्त बीजेपी पार्टी को दिया और कहा कि विधानसभा में मैगलगंज व मितौली को नगर पंचायत का दर्जा व औरंगाबाद को ब्लॉक क्षेत्र तथा महिला डिग्री कॉलेज सहित तमाम विकास कार्य कराए जाएंगे।
सपा प्रत्याशी सुनील कुमार लाला ने अपने सहयोगियों का आभार प्रकट करते हुए जनता के निर्णय को स्वीकारा है। साथ ही अपने कार्यकर्ताओं से संयम व सूझबूझ से काम लेने की अपील की है। उन्होंने बताया अन्य पार्टियों ने इस बार डमी कंडीडेट लड़ाने का काम किया है। अगर बसपा व कांग्रेस कुछ अच्छा लड़ती तो शायद परिणाम कुछ और ही होते।
2017 का चुनाव परिणाम
सौरभ सिंह सोनू (भाजपा) 92824
सुनील कुमार भार्गव (सपा) 68551
राजेश कुमार गौतम (बसपा) 41778
जीत का अंतर 24273
मोहम्मदी में मुस्लिम वोट के बंटवारे से भाजपा के लोकेंद्र प्रताप जीते
लखीमपुर खीरी। मोहम्मदी विधानसभा में सपा और भाजपा में कांटे की टक्कर रही। यहां बसपा ने मजबूत चुनाव लड़ा , जिससे भाजपा प्रत्याशी की जीत का अंतर काफी कम रहा। भाजपा के लोकेंद्र प्रताप सिंह ने 99,377 वोट पाकर सपा के दाउद अहम को 4,871 वोट से हराया, जबकि पिछले साल उनकी जीत का अंतर 33 हजार से भी ज्यादा था। दूसरे नंबर पर रहे दाउद को 94,506 वोट मिले, जबकि बसपा प्रत्याशी शकील अहमद को 31,144 वोट मिले।
विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और सपा के बीच ही कांटे की टक्कर देखने को मिली। मुस्लिम बहुल इलाकों में सरपट साइकिल दौड़ी तो वहीं अन्य क्षेत्रों कमल खिला। यहां भी ध्रुवीकरण का असर देखने को मिला, लेकिन मुस्लिम वोटों का सपा और बसपा में बंटवारा होने व बसपा का कैडर वोट सपा में जाने से भाजपा विधायक की जीत का अंतर पांच हजार के अंदर ही रहा।
सवर्ण, दलित और पिछड़ा वर्ग के वोटों के भाजपा के पक्ष में जाने से भाजपा को मजबूती मिली। फिर भी मतगणना के दौरान शुरू से अंत तक नेक टू नेक फाइट रही। आखिरकार भाजपा के लोकेंद्र प्रताप सिंह सपा के दाउद अहमद को शिकस्त देने में कामयाब रहे। मोहम्मदी विधानसभा सीट पर 2017 में भाजपा के लोकेंद्र प्रताप सिंह को 93000 मत मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के संजय शर्मा को 59082 वोट मिले थे।
जीत से उत्साहित भाजपा प्रत्याशी लोकेंद्र प्रताप सिंह ने योगी मोदी के चेहरे पर वोट मिलने की बात कही। उधर, सपा प्रत्याशी की तरफ से जिला महासचिव सगीर आलम ने बताया कि सपा ने बहुत अच्छा चुनाव लड़ा और अच्छे वोट मिले। बसपा और कांग्रेस के चुनाव न लड़ पाने से सपा को हार का सामना करना पड़ा
2017 के चुनाव परिणाम
लोकेंद्र प्रताप सिंह (भाजपा) 93000
संजय शर्मा (कांग्रेस) 59082
दाउद अहमद (बसपा) 57902
जीत का अंतर 33918
गोला से पांचवीं बार विधायक बने अरविंद गिरि
लखीमपुर खीरी। जातीय संघर्ष और ध्रुवीकरण में फंसे गोला के चुनाव में भाजपा के अरविंद गिरि ने पांचवीं बार जीत हासिल की है। अरविंद गिरि ने 1,26,534 मत हासिल कर 29,294 वोटों से सपा के विनय तिवारी को हराया है। विनय तिवारी को 97,240 वोट मिले हैं, जबकि बसपा की पटेल शिखा कनौजिया को 26,970 वोट मिले हैं।
गोला विधानसभा क्षेत्र में इस बार भाजपा और सपा के बीच में कड़ा मुकाबला हुआ। मुस्लिम मतदाताओं की एकजुटता का भी सपा को खास फायदा नहीं मिल पाया। यहां ब्राह्मण, कुर्मी वोटों में भी बंटवारा हुआ लेकिन बसपा के मजबूती से न लड़ने के कारण दलित वोट भाजपा के पाले में गया, जिससे भाजपा की शानदार जीत हुई। गोला विधानसभा में इस बार कुल 65.62 प्रतिशत मतदान हुआ जो पिछले साल के मुकाबले 2.78 फीसदी कम है। पिछले चुनाव में विजयी रहे भाजपा के अरविंद गिरि को जहां 122497 मत मिले थे वहीं दूसरे नंबर पर रहे सपा के विनय तिवारी को 67480 वोटों पर संतोष करना पड़ा था।
भाजपा से जीते विधायक अरविंद गिरि ने जीत का क्षेत्र की जनता को देते हुए बताया कि गोला में विकास का पहिया नहीं रुकेगा। जनता के भरोसे के लिये एक बार फिर से धन्यवाद। गोला विधानसभा को और आगे ले जाया जाएगा।
2017 के चुनाव परिणाम
अरविंद गिरि (भाजपा) 122497
विनय तिवारी (सपा) 67480
वृज स्वरूप कनौजिया (बसपा) 51542
जीत का अंतर 55017
मुस्लिम ध्रुवीकरण और सीएम योगी की रैली ने दिलाई भाजपा को जीत
लखीमपुर खीरी। श्रीनगर (सु) सीट पर इस बार सबसे ज्यादा वो टिंग हुई, जिसका लाभ भाजपा प्रत्याशी मंजू त्यागी को मिला। उन्होंने सपा प्रत्याशी रामसरन को 17,608 वोटों से हराया। रामसरन को 90,641 वोट मिले, जबकि बसपा की मीरा बानो को 23,091 वोट मिले।
विधानसभा क्षेत्र श्रीनगर में आठों विधानसभा सीटों के मुकाबले इस बार 71.59 प्रतिशत वोटिंग हुई है, जो कि आठों विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा है। हालांकि, यह मतदान प्रतिशत पिछले साल के मुकाबले 0.61 फीसदी कम है। यहां भाजपा और सपा के बीच रोचक और कड़ा मुकाबला दिखाई दिया। मुस्लिम वोटों का सपा के पक्ष में ध्रुवीकरण हुआ, लेकिन बसपा के परंपरागत वोटों में इस बार भाजपा ने गहरी सेंध लगाई। दलित, सवर्ण और पिछड़े वर्ग के वोटों के बल पर भाजपा को जीत हासिल हुई।
उधर, सीएम योगी की रैली ने भी इसका असर दिखाया। वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा की मंजू त्यागी 112941 वोट पाकर विजयी रही थीं, जबकि समाजवादी पार्टी की मीरा बानो 58002 वोट पाकर रनर रहीं थी। इस बार मीरा बानो बसपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं।
2017 के चुनाव परिणाम
मंजू त्यागी (भाजपा) 112941
मीरा बानो (सपा) 58002
प्रवीन कुमार (बसपा) 44757
जीत का अंतर 54939
मुस्लिम ध्रुवीकरण ने भाजपा के योगेश वर्मा को दिलाई जीत
लखीमपुर खीरी। पिछले चुनाव में 37 हजार से ज्यादा वोटों से जीते भाजपा के योगेश वर्मा ने 1,27,663 वोट पाकर सपा के उत्कर्ष वर्मा को इस बार 20,578 वोटों से हराया। उत्कर्ष वर्मा को 1,07,085 वोट मिले। हालांकि, इस बार जीत का अंतर कम दिखा, लेकिन बसपा के मोहन बाजपेई के मजबूती से चुनाव न लड़ने से उनकी जीत पक्की हो गई। मोहन बाजपेई को 24,014 वोट मिले।
जिले की सबसे महत्वपूर्ण मानी जाने वाली लखीमपुर सदर विधानसभा सीट पर भाजपा के योगेश वर्मा और सपा के उत्कर्ष वर्मा के बीच सीधा मुकाबला था, लेकिन मुस्लिम ध्रुवीकरण और योगी के चेहरे पर पड़े वोट ने भाजपा के योगेश वर्मा को फिर से जीत का स्वाद चखाया। सदर सीट पर बसपा के मोहन बाजपेई के मजबूती से चुनाव लड़ने के कारण यहां भाजपा के रास्ते में रोड़ा आ रहा था।
मोहन बाजपेई ने ब्राह्मण वोटों में कुछ सेंध लगाई लेकिन चुनाव पर बहुत ज्यादा असर नहीं डाल पाए। दलित वोटों का रुझान इस बार भाजपा के पक्ष में रहा। उधर, प्रत्याशी से लोगों की भले ही नाराजगी रही लेकिन वोट सीएम योगी के चेहरे पर लोगों ने खूब मतदान किया। उधर, पिछड़ा वर्ग और दलित वोटों की भाजपा के पक्ष में एकजुटता से मुस्लिम ध्रुवीकरण का असर कम हो गया था। पिछले चुनाव में 122677 वोट पाकर भाजपा के योगेश वर्मा चुनाव जीते थे। जबकि सपा के उत्कर्ष वर्मा 84929 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे।
2017 के चुनाव परिणाम
योगेश वर्मा (भाजपा) 122677
उत्कर्ष वर्मा (सपा) 84929
शशिधर मिश्र (बसपा) 39068
जीत का अंतर 37748
एक तरफा जीत पर खुशी व्यक्त करते जिलाध्यक्ष सुनील सिंह।