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पुत्र के बाद पिता की हत्या करने के दोषी को उम्रकैद

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अदालत ने 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया
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गवाही देने पर पिता को गोली मारकर मौत के घाट उतारा था
लखीमपुर खीरी। करीब आठ साल पहले पुत्र की हत्या में गवाही देने पर पिता को भी मौत के घाट उतार देने के मामले की सुनवाई करते हुए एडीजे रामेंद्र कुमार ने हत्या के दोषी को को उम्रकैद की सजा सुनाते है। साथ ही उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी कौशल किशोर ने बताया कि धौरहरा थाना क्षेत्र के गांव खनवापुर में रहने वाले पप्पू पुत्र भगवती प्रसाद की हत्या में गांव के ही ठकुरी प्रसाद को उम्र कैद की सजा हुई थी। हाईकोर्ट से अपील जमानत पर छूटने के बाद ठकुरी ने पप्पू के पिता भगवती प्रसाद को सबक सिखाने की योजना बनाई। 24 दिसंबर, 2013 को जब भगवती दूसरे बेटे राम कुमार के साथ झोपड़ी में सोया हुआ था, तभी रात को ठकुरी ने भगवती प्रसाद की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने आनन-फानन में ठकुरी को हत्या में प्रयुक्त तमंचे के साथ गिरफ्तार कर लिया था। अदालती सुनवाई के दौरान राम कुमार ने बताया कि उसके बड़े भाई पप्पू की हत्या वाले मुकदमे में उसके पिता भगवती प्रसाद ने ठकुरी के खिलाफ गवाही दी थी, जिसमें ठकुरी को आजीवन कारावास की सजा हुई थी, लेकिन हाईकोर्ट में अपील जमानत मिल जाने के बाद उसने पिता की 24 दिसंबर 2013 को गोली मारकर हत्या कर दी थी। बताया कि पिता की हत्या से करीब पांच साल पहले पप्पू की हत्या की गई थी।
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सुनवाई के दौरान डॉ. अनुकल्याण मिश्रा, रामपाल, एसआई शिव कुमार सिंह, इंस्पेक्टर राजकुमार सिंह, डॉ. वीके वर्मा, इंस्पेक्टर भगवान चंद्र ने भी बचाव पक्ष की कोई दलील नहीं लगने दी। अदालत ने सुनवाई के बाद ठकुरी को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई है।
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सजा सुनने के बाद बंदी बोला फांसी दे दो
शुक्रवार को अदालती सुनवाई के दौरान अजीब हालात बन गए। भगवती प्रसाद की हत्या के दोषी ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि इस मामले में उसे गलत तरीके से सजा सुनाई जा रही है। अगर सजा देना ही है तो उसे फांसी दे दी जाए।
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