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खीरीः 36 घंटे बाद भी अपनों का नहीं चला पता, रोते-रोते सूज गईं आंखें

सार

रमियाबेहड़ के परौरी गांव में घाघरा में डूबी थी नाव, 17 लापता लोगों में नौ को बचाया गया, आठ अभी भी लापता
 
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मनोज की छोटी बहन की हालत बिगड़ी। संवाद
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विस्तार
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बुधवार देर रात पहुंचे थे कमिश्नर, रात तीन बजे तक चला रेस्क्यू
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एक ही परिवार के पांच लोग लापता, घर वालों का हुआ हाल बेहाल
लखीमपुर खीरी। धौरहरा तहसील क्षेत्र के रमियाबेहड़ ब्लॉक में घाघरा नदी में बुधवार को नाव पलटने से हुए हादसे में लापता 17 लोगों में कुल नौ लोगों को बचा लिया गया है, जबकि आठ लोग अभी भी लापता हैं। इन आठ लापता लोगों में पांच तो एक ही परिवार के हैं, जिनके इंतजार में रो-रोकर परिजन की आंखें सूज गई हैं।
बुधवार को रमियाबेहड़ ब्लॉक के ग्राम पंचायत परौरी के मजरा देवमनिया के 17 लोग नदी पार अपने खेत देखने गए थे। ग्रामीणों ने बताया कि बुधवार सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर नदी बढ़ने पर नाव से वह लोग देवमनिया की ओर आ रहे थे कि नदी में पानी बढ़ गया और ऊंची-ऊंची लहरें उठने लगीं। रेस्क्यू कर बचाए गए प्रत्यक्षदर्शी भीम, श्री केशन, विक्रम और मनोज ने बताया कि नदी में अचानक करीब 5-6 फीट ऊंची-ऊंची लहरें उठने लगीं, जिससे उनकी नाव पलट गई और सभी 17 लोग नदी की तेज लहरों में बहने लगे।
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प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि किसी ने लकड़ी पकड़ी तो किसी ने तेज आवाज लगाई। बचाव की बहुत कोशिश की लेकिन थक हारकर खुद को भगवान के भरोसे छोड़।
नाव पलटने के बाद 17 लोगों में बचे भीम 35 वर्ष पुत्र नीलम और श्रीकृष्ण 30 वर्ष पुत्र सम्हरू ने बताया कि उनकी जमीन को नदी काट चुकी है। खेत नदी पार है, जिसे वह देखने गए थे, लेकिन सुबह साढे़ दस बजे नदी में पानी बढ़ गया। नाव पलटी तो कुछ देर तक सब साथ रहे, उसके बाद सब नदी में बहने लगे। बहकर वह बिंजहा गांव के किनारे पहुंच चुके थे। मनोज बताते हैं कि एक नाव वाले ने इनको देखा तो हाथ देकर इशारा किया, जिसके बाद उसी नाव वाले ने दोनों को बचाया।
नाव पलटने के बाद नदी में बहकर किसी तरह बचे विक्रम 20 वर्ष पुत्र बाढ़ू ने बताया कि वह जब नदी में बह गए तो, उन्होंने तेज लहरों के बीच नदी में बह रहे सेमल के पेड़ को पकड़ लिया और उसी के सहारे वह नदी की लहर में बहते चले गए। बाद में नदी किनारे लगे तो वह भी बच सके।

मनोज बचकर तो निकले, लेकिन मां-बेटा-पत्नी समेत पांच लापता
रमियाबेहड़ इलाके में नाव पलटने से हुए हादसे के मामले में सबसे दर्दनाक कहानी हादसे में बचे मनोज 30 पुत्र सत्यनारायण की है। मनोज की मां बतिया, पत्नी जमुनी, चोटी बहन प्रेमा, भतीजा निकेश और ढाई साल का बेटा कुलदीप समेत पांच लोग अब भी लापता हैं। अपने परिवार के पांच सदस्यों के लापता होने पर मनोज अपनी सुध बुध खो बैठा है। बताते हैं कि उनके घर में दो एकड़ की खेती है, वह भी नदी पार है, जहां धान की फसल उगी हुई थी। खेत में काम करके ही घर परिवार का गुजारा चलता था। अभी मनोज के घर में सिर्फ घर में सिर्फ बड़ी बहन नेमा, चोटी बहन रितु मौजूद हैं, जिनका रो रोकर बुरा हाल हैं। जबकि पिता और बड़ा भाई परिवार वालों की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं।

हादसे के बाद गांव पहुंची आपूर्ति विभाग की टीम
लखीमपुर खीरी। परौरी गांव के लोगों के हादसे का शिकार होकर होने के बाद प्रशासनिक अमला भी हरकत में आया और गांव पहुंचे सप्लाई इंस्पेक्टर ने पीड़ित लोगों के यहां जाकर यह सुनिश्चित करना शुरू किया कि किन किन लोगों का राशन कार्ड बना है। इस दौरान ज्यादातर लोगों के राशन कार्ड ही बने नहीं दिखे। मनोज ने बताया कि राशन कार्ड तो बना है, लेकिन परिवार के सभी सदस्यों के नाम अंकित नही हैं। संवाद
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17 लापता लोगों में प्रशासन का नौ लोगों को बचाने का दावा, गांव में मिले सिर्फ चार लोग
लखीमपुर खीरी। बुधवार को नाव पलटने से हुए हादसे में लापता 17 लोगों के मामलेे में जिला प्रशासन ने दावा किया कि नौ लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि परौरी गांव में बचाए गए सिर्फ चार लोग मनोज, विक्रम, श्री कृष्ण और भीम दिखाई दिये। इन चारों ने बताया कि प्रशासन कह रहा है कि पांच लोग और बचाए गए हैं लेकिन वो कहां हैं, यह पता नहीं चल पाया है।
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