रामायण, महाभारत काल तक के शिवमंदिर हैं यहां
सावन मेला आज से, सज गए शिवालय
सावन का महीना शुरू होते ही जिले का वातावरण शिवभक्ति से सराबोर हो उठा है। शिव मंदिरों पर रौनक बढ़ गई है। हिमालय की तलहटी का तराई क्षेत्र शिव साधकों का प्रमुख केंद्र रहा है। यही कारण है कि खीरी जिले में शिवमंदिरों की बहुतायत हैं। इनमें से कई मंदिर तो रामायण और महाभारत कालीन हैं। गोला का प्राचीन शिवमंदिर रामायणकाल का तो शहर से नौ किलोमीटर दूर स्थित लिलौटी नाथ मंदिर और मोहम्मदी क्षेत्र का टेढ़ेनाथ मंदिर महाभारत कालीन माना जाता है।
सावन माह बुधवार से शुरू हो रहा है। शिव के जलाभिषेक के लिए सोमवार से कांवड़ियों का जमावड़ा शुरू हो गया है। हर तरफ सड़कों पर केसरिया कपड़ों में कांवड़िए नजर आ रहे हैं। वातावरण हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज रहा है। पवित्र नदियों का जल लेकर कांवड़िए सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय कर छोटी काशी पहुंच रहे हैं। सोमवार को गोला शिव मंदिर समेत अन्य प्राचीन शिव मंदिरों में भारी भीड़ होगी।
गोला का पौराणिक शिवमंदिर
गोलागोकर्णनाथ का पौराणिक शिवमंदिर रामायण काल में स्थापित बताया जाता है। किवदंती है कि यह शिवलिंग रावण ने स्थापित किया था। शिवलिंग गाय के कान के आकार का होने के कारण इसका नाम गोकर्णनाथ पड़ा। मंदिर के पास ही गोकर्णतीर्थ है। दूरदराज से आने वाले श्रद्धालु तीर्थ में स्नान करने के बाद प्राचीन शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। अपनी विशेष महत्ता के कारण गोला को छोटी काशी भी कहते हैं।
प्राचीन लिलौटीनाथ शिव मंदिर
शहर से नौ किलोमीटर दूर निघासन रोड पर स्थित लिलौटीनाथ मंदिर अपनी विशिष्टताओं के लिए लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यह शिवलिंग महाभारत कालीन गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा द्वारा स्थापित बताया जाता है। यह शिवलिंग दिन में पांच बार अपना रंग बदलता है। सुबह मंदिर खोले जाने पर पूजित मिलता है।
प्राकृतिक परिवेश में स्थित इस मंदिर पर पूरे सावन भर श्रद्धालुओं का मेला लगा रहता है।
ओयल का मेढक शिव मंदिर
जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर ओयल कस्बे में स्थित मंडूक तंत्र और श्री यंत्र पर आधारित मेढक शिव मंदिर का निर्माण लोक कल्याण की भावना से ओयल स्टेट के राजा बख्त सिंह ने शुरू कराया था। इसका निर्माण राजा अनिरुद्ध सिंह ने पूरा कराया। मंदिर का चबूतरा जिसपर गर्भगृह स्थित है श्रीयंत्र की रचना के आधार पर निर्मित है। पूरा मंदिर एक विशालकाय मेढक की पीठ पर निर्मित है। यह मंदिर तंत्र साधना का केंद्र है।
प्राचीन भुइफोरवाथ शिवमंदिर
शहर में स्थित प्राचीन भुईफोरवानाथ शिव मंदिर शहर ही नहीं आसपास क्षेत्र के लोगों के लिए गहन आस्था का केंद्र है। भूमि फोड़कर प्रकट होने के कारण इस शिवलिंग का नाम भुइफोरवानाथ पड़ा है। मंदिर करीब दस फिट ऊंचे चबूतरे पर बना हुआ है। प्रवेशद्वार पर लगे लगे दो वटवृक्ष मंदिर का प्राकृतिक प्रवेश द्वार बनाते हैं। यहां महाशिवरात्रि के अलावा पूरे सावन भर शिवभक्तों का तांता लगा रहता है। सोमवार को भंडारे होते हैं।
अन्य प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिर
इन मंदिरों के अलावा मोहम्मदी क्षेत्र का ढेढ़ेनाथ शिवमंदिर, कफारा स्थित लीलानाथ मंदिर, देवकली का शिवमंदिर, सिंगाही का भूलभुलैया शिवमंदिर और शहर का जंगलीनाथ मंदिर आदि कई ऐसे प्राचीन और प्रसिद्ध शिवमंदिर हैं जो लाखों लोगों की गहन आस्था का केंद्र हैं। इन मंदिरों में सावन के महीने में हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन पूजा अर्चना करते हैं।