कहा, दो साल में ही धौरहरा का हाल हुआ बेहाल
पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि दो साल में ही धौरहरा बेहाल हो गया है। बाढ़ पीड़ितों की कोई सुनने वाला नही है। बाढ़ में लोगों के मकान, जमीन और फसलें नष्ट हो गई हैं। धौरहरा के लोग बाढ़ के कारण अपना सब कुछ गंवाने के बाद दो वक्त की रोटी भी नहीं पा रहे है। जिला प्रशासन सिर्फ बाढ़ पीड़ितों के मुआवजे के लिए कागजी खानापूर्ति कर रहा है।
जितिन प्रसाद बाढ़ क्षेत्र का जायजा लेने के बाद मिर्जापुर में ग्रामीणों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गांव में बाढ़ पीड़ितों के पास न तो रहने के लिए मकान है और न ही खाने के लिए राशन। यहां तक पहनने के लिए कपड़े भी बाढ़ पीड़ितों के पास नहीं बचे है। इनको तुरंत सहायता देने के बजाय जिला प्रशासन उन्हें टरका रहा है।
इससे पहले पूर्व केन्द्रीय मंत्री खमरिया गांव पहुंचे जहां कार्यकर्ताओं से मिलने के बाद वह ग्राम मूसेपुर पहुंचे फिर बाढ़ प्रभावित गांव मिर्जापुर गए। जहां बाढ़ पीड़ितों ने पूर्व केंद्रीय मंत्री को आपबीती सुनाई और कहा कि अब तक प्रशासन द्वारा उन्हें कोई सहायता नहीं प्रदान की है।
पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि इन दो सालों में धौरहरा में कोई भी विकास कार्य नहीं हुआ है। केंद्र और राज्य सरकारें धौरहरा के लोगों की समस्याओं को अनदेखा कर रही हैं। धौरहरा क्षेत्र में विकास कराना हमेशा उनका लक्ष्य रहा है और वह सदैव इस क्षेत्र के सतत विकास के लिए प्रयत्नशील हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने लखीमपुर में जिले के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता तेज नरायन त्रिवेदी से मुलाकात कर मंत्रणा की। उनके साथ अलीम किरमानी, डॉ. कलामुद्दीन, कमलेश मिश्रा, जमाल अहमद, अनिल गुप्ता, आशुतोष पांडेय, राजेश अवस्थी, रामजी सेठ, सुशील श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन मौजूद रहे।