मोहम्मदी के गोमती तट पर फोटोग्राफरी करते अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफर सतपाल सिंह और उनकी टीम
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मोहम्मदी। कोरोना आपदा के दौरान नदियों व पर्यावरण पर प्रभाव जानने के लिए एक दिवसीय गोमती फोटोग्राफी यात्रा संपन्न हुई। आपदा के बाद पर्यावरणीय बदलावों को चित्रित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय नेचर फोटोग्राफर सतपाल सिंह के नेतृत्व में कठिना-गोमती संगम द्रोणाचार्य घाट पर भ्रमण कर फोटोग्राफी की गई।
सतपाल सिंह ने बताया कि यात्रा का मुख्य उद्देश्य कोरोना आपदा का नदी और पर्यावरण पर प्रभाव के साथ गोमती और उसकी सहायक नदी कठिना की वर्षा ऋतु से ठीक पहले की स्थिति का निरीक्षण और फोटोग्राफी करना रहा। बताया कि गुरु द्रोणाचार्य घाट पर गोमती और कठिना के संगम पर पहुंचना काफी सुखद अनुभव था। यहां कठिना गोमती में समा जाती है और यहां से गोमती की धारा में अधिक फैलाव और वेग आ जाता है। यात्रा के दौरान नदी व उससे जुड़े भिन्न- भिन्न पहलुओं को चित्रित किया गया। कोरोना महामारी में लोगों का नदी तटों पर सीमित संख्या में पहुंचने से घाटों पर कूड़ा और प्रदूषण काफी कम दिखा। नदी में पाए जाने वाली वनस्पतियों व जीव-जंतुओं के जीवन पहलुओं की भी तस्वीरें ली गईं।
फोटोग्राफी दल के सदस्य प्रियांशु त्रिपाठी ने बताया कि गोमती तट पर दुर्लभ और एकांतप्रिय पक्षी ब्रॉन्ज विंग्ड जकाना ने बच्चों को जन्म दिया है, इसके चित्र भी लिए गए । अनूप बाजपई ने बताया कि मां गोमती की स्थिति अब कुछ बेहतर हो रही है। यात्रा में हिमांशु वर्मा भी शामिल रहे।