लखीमपुर खीरी। जिले में अवैध शराब के खिलाफ आबकारी विभाग और पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। हर साल हजारों रिपोर्ट दर्ज हो रही हैं। लाखों लीटर अवैध शराब बरामद की जा रही है और हजारों लोगों की गिरफ्तारी भी हो रही है। इसके बावजूद जिले में अवैध शराब का नेटवर्क पूरी तरह नहीं टूट सका है। यही इस पूरी कार्रवाई का सबसे बड़ा सवाल है।
आबकारी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक चार वर्षों में 14,901 रिपोर्ट दर्ज की गईं। इस दौरान 3,084 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 3.41 लाख लीटर से अधिक अवैध शराब बरामद हुई। इन आंकड़ों में वर्ष 2026 के सात महीनों की कार्रवाई शामिल नहीं है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, जिले में अवैध शराब बनाने, तस्करी और बिक्री की गतिविधियां अब भी लगातार सामने आ रही हैं।
विश्लेषण करने पर सामने आता है कि चार वर्षों में औसतन प्रतिदिन 10 रिपोर्ट दर्ज हुईं और करीब दो लोगों की गिरफ्तारी रोज हुईं और लगभग 234 लीटर अवैध शराब बरामद की गई। यानी कार्रवाई लगातार हुई, लेकिन अवैध कारोबार की आपूर्ति शृंखला और नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त नहीं हो सका।
आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले का भौगोलिक क्षेत्र बड़ा होने, ग्रामीण इलाकों के विस्तार और लगातार बदलते तरीकों के कारण अवैध शराब के खिलाफ अभियान चुनौतीपूर्ण रहता है। विभाग समय-समय पर पुलिस के साथ संयुक्त अभियान चलाकर कार्रवाई करता है। वहीं विभागीय सूत्रों का मानना है कि त्योहारों और विशेष अवसरों पर अवैध शराब की मांग बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में इसका निर्माण और तस्करी भी बढ़ जाती है। संवाद
कई निरीक्षकों के क्षेत्र में डेढ़ साल से फेरबदल नहीं-
जिले में छह आबकारी निरीक्षक तैनात हैं। इनमें कुछ निरीक्षक लंबे समय से एक ही कार्यक्षेत्र में कार्यरत हैं। प्रभात त्रिपाठी और हृदय नारायण पांडेय फरवरी 2024 से, जबकि अविनाश रावत और अमित कुमार जून 2025 से अपने-अपने कार्यक्षेत्र में तैनात हैं। राजेश कुमार और सुशील कुमार को जून 2026 में नया कार्यक्षेत्र मिला है। हालांकि, लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में तैनाती और अवैध कारोबार के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बरामदगी और गिरफ्तारी से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। अवैध शराब के स्रोत, आपूर्ति शृंखला, वित्तीय नेटवर्क और मुख्य संचालकों तक पहुंचकर कार्रवाई करना भी उतना ही जरूरी है। साथ ही जिन मामलों में रिपोर्ट दर्ज हुई हैं, उनमें प्रभावी अभियोजन और दोषसिद्धि की दर बढ़ना भी नेटवर्क तोड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है।
एक नजर आंकड़ों पर
वित्तीय वर्ष
मुकदमे
गिरफ्तारी
जब्त शराब (लीटर)
2021-22
3161
821
75,555.74
2022-23
3666
972
82,175.59
2023-24
3936
817
89,747.96
2024-25
4138
474
94,436.34
नोट : ये आंकड़े विभाग से लिए गए हैं।