लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीज और उनके तीमारदारों के साथ यहां का स्टाफ कभी भी संक्रमण का शिकार हो सकता है क्योंकि वार्डों से लेकर स्टाफ रूम और डॉक्टरों के ओपीडी कक्ष तक जबरदस्त सीलन है। वार्डों की छत पर झाड़ झंखाड़ उगे हुए हैं, जिनकी जड़ें कमरे के भीतर तक आ गईं हैं। इस कारण बरसात में पानी टपकता है।
जिला अस्पताल की सालों पुरानी बिल्डिंग बेहद जर्जर हो चुकी है। छत से लेकर दीवारों पर झाड़ियां उग आईं है, जिनके जड़ें दीवार पार कर वार्डों से लेकर स्टाफ रूम में दिखने लगी हैं। ऐसे में मरीजों से लेकर वार्ड में ड्यूटी कर रहे स्टाफ के लिए हर समय संक्रमण का खतरा बना रहता है। वहीं तेज बारिश में बिल्डिंग के गिरने तक का डर रहता है।
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इन बीमारियों का है खतरा
एलर्जी, त्वचा का संक्रमण, निमोनिया, वायरल इंफेक्शन, फंगस, अस्थमा, खांसी, जुकाम, गले, सिर और जोड़ों में दर्द और डर्मिटाइटिस।
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क्यों होती है सीलन और फंगस
बरसात का मौसम बहुत संवेदनशील होता है। इस समय जरा सी लापरवाही शरीर के लिए घातक हो सकती है। इस मौसम में कीटाणु और सूक्ष्मजीव की संख्या भी तेजी से बढ़ती और फैलती है। इससे दीवारों पर सीलन और सफेद रंग का फंगस हो जाता है। जो किसी के लिए भी घातक हो सकता है।
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वार्डों की छत पर उगे झाड़ झंखाड़ साफ कराए जा रहे हैं। जल्द ही वार्ड टूटने वाले हैं, क्योंकि मेडिकल कॉलेज के लिए अस्पताल बनना है।
-डॉ. सीएस सिंह, आर्थो सर्जन एवं प्रभारी सीएमएस