लखीमपुर खीरी। शारदा और घाघरा नदियों का जलस्तर धीरे धीरे कम होने से बाढ़ का प्रकोप घट रहा है। बावजूद इसके पलिया और मझगईं इलाके में अब भी रास्तों और गांवों में पानी भरा हुआ है। कई गांवों में आने जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। नदियों का जलस्तर कम होने से भूकटान तेज हो गया है। तिकुनियां क्षेत्र में मोहाना नदी तेजी से कटान कर रही है। इससे लोग गांव छोड़ कर पलायन की तैयारी कर रहे हैं। बेलाकलां गांव के कई घरों में पानी भर गया है तो कई गांवों का संपर्क कट गया है।
शुक्रवार को शारदा बैराज पर शारदा नदी का जलस्तर 135.25 दर्ज किया गया। जो खतरे के निशान 135.49 से मात्र 0. 24 सेंटीमीटर नीचे है। जब कि घाघरा का जलस्तर 135.50 दर्ज किया गया है जो खतरे के निशान 136.78 से 1.28 सेमी नीचे है। इसके साथ ही सुहेली और कर्णाली नदियों के जलस्तर में भी कमी आई है।
महेवागंज। निघासन और सदर तहसील के बॉर्डर पर बसे ग्रंट 12 गांव में शारदा ने खूब तबाही मचाई। दर्जनों घर नदी में समा गए। सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो गई। कटान पीड़ित सड़क पर आ पहुंचे है। फिलहाल नदी के तेवर कुछ शांत होने से ग्रामीण राहत महसूस कर रहे है। नंदलाल, अवधेश, ब्रजेश, लक्ष्य राम, गोबर्धन, रामभरोसे, ओर दीनबंधु समेत करीब पचास से ज्यादा लोगों के घर एक महीने में शारदा लील चुकी है। पीड़ितों का कहना है कि मदद के नाम पर उन्हें एक बार राहत किट दी गई। तबाही मचाने के बाद अब नदी के तेवर कुछ शांत हुए हैं। जबकि चार दिन पहले बनबसा से छोड़े गए अतिरिक्त पानी से सदर तहसील के गूम, लगड़ीपुर, भुलभुलिया, बड़ागाँव, बहालीपुरवा, कुचिलहा, मंगलीपुरवा सहित करीब तीस गांवों में बाढ़ का पानी भरा है। सबसे ज्यादा दयनीय हालत खगईपुरवा गांव की है। चढ़ती- उतरते पानी से लोगों को दुश्वारियां झेलनी पड़ रहीं है। नाव ही आवागमन का सहारा है। गांव गूम, बेड़हासुतिया और अहिराना गांव शारदा नदी के किनारे बसा है। ग्रंट 12 गांव के कटान पीड़ित दोबियाना गांव और सड़क किनारे डेरा डाले है। कभी पक्के घरों में रहने वाले ग्रामीण घासफूस और त्रिपाल के घरौंदे में खानाबदोश से जीवन जीने को मजबूर है।
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चौखड़ा फार्म, खालेपुरवा, नयापुरवा के रास्तों पर पानी
मझगईं। बेलाकलां गांव में सुहेली नदी का पानी कई घरों में भर गया है। जिससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई दिनों से पानी भरने के बाद भी अब तक किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने हालात जानने की जहमत नहीं उठाई है। उधर शारदा नदी का पानी भी कई गांवों के रास्तों पर चल रहा है।
बेला कलां गांव में सुहेली नदी का पानी कई घरों में भर गया है। प्रदीप, ध्रुव, शिशुपाल, मुरली समेत कई ग्रामीणों ने बताया कि उनके घरों में पानी भर गया है नल तक पानी में डूब गए है। जिससे लोगों को शुद्ध पानी भी नहीं मिल रहा है। लेकिन कई दिनों से पानी भरने के बाद भी प्रशासनिक अधिकारी मौके पर झांकने तक नहीं आए हैं। पानी भरा होने से मवेशियों को भी दिक्कत हो रही है। चौखड़ा फार्म में भी सुहेली नदी का पानी खेतिहर इलाकों में भरा है। चौखड़ा से मझगईं आने वाले रोड पर बिट्टू सिंह के खेत के पास तेज धार से करीब चार फुट पानी सड़क पर चल रहा है। जिससे आवागमन पूरी तरह से बंद हैं। बेला टॉपर से नौगवां जाने वाले रोड पर स्थित रपटा पुल पर भी एक फुट पानी चलने लगा है। दूसरी तरफ शारदा नदी की बाढ़ से खालेपुरवा व नयापुरवा जाने वाले रास्ते पर पानी भरा हुआ है। संवाद
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रास्तों पर पानी, ऐसे में नाव ही सहारा
पलियाकलां। शारदा नदी का जलस्तर कम तो हो रहा है लेकिन रास्तों पर पानी न निकलने से लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में इमलिया फार्म जाने वाले रास्ते पर नाव चल रही है। यहां जमुनहा, जंगल नंबर सात से आने वाले ग्रामीण नाव का सहारा ले रहे हैं। शुक्रवार को भी पलिया के डिग्री कॉलेज में पेपर देने जाने के लिए राजू मिश्रा को नाव का सहारा लेना पड़ा। ठोकर नंबर जीरो व एक पर भी पानी कम हुआ है लेकिन ग्रामीण नदी पार मवेशियों के लिए नाव के जरिए चारा लाने को विवश हैं। संवाद
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बाढ़ पीड़ित परिवारों को बांटी गयी राहत सामग्री।
धौरहरा। शुक्रवार को तहसील धौरहरा के विकास खंड ईसानगर के मिलिक व चकदहा के 570 बाढ़ पीड़ित परिवारों को तहसीलदार धौरहरा संतोष कुमार शुक्ला व विधायक प्रतिनिधि राजीव अवस्थी ने बाढ़ राहत केंद्र हसनपुर कटौली में जाकर राहत सामग्री बांटी।
तहसीलदार ने बताया की क्षेत्र में जितने भी गांव बाढ़ से प्रभावित है उन सभी गांवों में बाढ़ राहत सामग्री बंटवाई जाएगी। इस दौरान राजस्व निरीक्षक रामचंद्र , लेखपाल शशांक शुक्ल, लेखपाल यशपाल सिंह,ग्राम प्रधान दिनेश दीक्षित, राजू शुक्ल आदि मौजूद रहे। संवाद