पशुओं के लिए इस्तेमाल की जाने वाली डाइक्लोफेनेक नामक दवा तराई के गिद्धों के लिए जानलेवा साबित हुई। दुधवा नेशनल पार्क के पशु चिकित्सक डॉ दया शंकर बताते हैं कि संबधित दवा के इस्तेमाल के बाद पशुओं की मृत्यु होने पर उनका मांस खाने से गिद्धों की किडनी फेल हो जाती थी और उनकी मृत्यु हो जाती थी। नजीजतन व्हाइट बिल्ड बल्चर और किंग बल्चर प्रजाति के गिद्धों की संख्या तेजी से घटने लगी। गिद्धों की घटती संख्या को सरकार ने गंभीरता से लिया। सरकार ने डाइक्लोफेनेक नामक दवा की बिक्री और इस्तेमाल दोनों पर प्रतिबंध लगाया। तराई क्षेत्र को डाइक्लोफेनिक फ्री जोन घोषित किए जाने के बाद गिद्धों को जीवनदान मिला।
मुख्य वन संरक्षक ने यह कहा
मुख्य वन संरक्षक व फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व संजय पाठक का कहना है कि भीरा रेंज की पल्हनापुर बीट जंगल से सटे इलाके में व्हाइट बिल्ड बल्चर का झुंड दिखाई दिया है। यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में शुभ संकेत है। इनके संरक्षण के लिए वन विभाग लगातार प्रयत्ननशील है।