लोग छप्परों और चारपाई पर बैठे हैं, तख्त पर चूल्हा रखकर बना रहे हैं खाना
धौरहरा। तहसील क्षेत्र में घाघरा व शारदा नदियों में आई बाढ़ से करीब पचास गांवों की बीस हजार आबादी प्रभावित है। सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गई है। बाढ़ से प्रभावित ग्रामीण ऊंचे स्थान पर पलायन करने को मजबूर हैं, लेकिन प्रशासन से उन्हें कोई सहायता नहीं मिल रही है।
ईसानगर क्षेत्र के चकदहा, कैरातीपुरवा, गौढ़ी, मांझा सुमाली मिलिक, ओझापुरवा, लौकाही मल्लापुर, गनापुर सहित कई गांव के लोग बाढ़ में फंसे हुए हैं। गांवों में चारों तरफ बाढ़ का पानी भरा होने से जनजीवन अस्त व्यस्त है। लोग छप्परों और चारपाई पर बैठे हैं। तख्त पर चूल्हा रखकर खाना बना रहे हैं। गांव जाने वाले सभी रास्तों पर बाढ़ का पानी बह रहा है, जिससे गांव तक पहुंचने में भी दिक्कत हो रही है। मजबूरन नाव से लोग आवागमन कर रहे है।
ईसानगर का चकदहा गांव घाघरा नदी के उस पार बसा है, जिसके सभी मजरे बाढ़ से प्रभावित हैं। तहसील प्रशासन की तरफ से अभी तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कोई भी राहत सामग्री नहीं पहुंचाई गई है। चकदहा गांव के लोग घाघरा नदी को दो किलोमीटर नाव से पार कर कटौली में बनी बाढ़ राहत तक कैसे पहुंच पाएंगे, इसका सवाल किसी के पास नहीं है। वहीं, एसडीएम धौरहरा रेनू का कहना है कि बाढ़ राहत सामग्री की मांग की गई है, जैसे ही राहत सामग्री प्राप्त होगी बाढ़ पीड़ितों को वितरित कर दी जाएगी।