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कुश ने अस्पताल खोलकर दिया पिता को फादर्स डे का तोहफा

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पिता के साथ डॉ कुश जुनेजा। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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मैलानी। साधारण परिवार में जन्मे कुश जुनेजा ने डॉक्टर बनकर अपने पिता और परिवार का नाम रोशन किया है। उन्होंने फादर्स डे से एक दिन पहले शनिवार को ही नगर में एक अस्पताल भी खोला है।
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मोहल्ला धर्मशाला के मूल निवासी कुश जुनेजा के दादा मक्खन लाल सन 1970 में भीरा गए और वहां सब्जी का कारोबार शुरू किया। वहां आमदनी ठीकठाक होने पर कुश के पिता बलदेव भी पिता का हाथ बंटाने के लिए 1986 में भीरा चले गए पर परिवार के अन्य सदस्य मैलानी में ही रहे। सन 1987 में बलदेव ने किराना की दुकान की और साथ में ही सब्जी का कारोबार भी चलता रहा।
इधर, कुश ने पलिया के एक निजी कॉलेज से हाईस्कूल और इंटर पास किया। कुश की शुरू से ही डॉक्टर बनने की ख्वाहिश थी, पिता भी यही चाहते थे। कोरोनाकाल में जान गंवाने वाले नगर के प्रमुख चिकित्सक डॉ एसके मजूमदार, कुश को यूपी सीपीएमटी के एंट्रेंस की तैयारी कराते थे। उनकी मेहनत रंग लाई और कुश का 2010 में सीपीएमटी में चयन हो गया। इसके बाद उसने 2019 एमडी पूरा किया। उसी वर्ष डॉ कुश की संविदा पर भीरा पीएचसी पर नियुक्ति हो गई और अगले साल बिजुआ सीएचसी में संविदा पर नियुक्ति हुई। उन्होंने फादर्स डे से एक दिन पहले शनिवार को ही मैलानी में एक हॉस्पिटल की खोलकर पिता को फादर्स डे का तोहफा दिया। उन्होंने अपनी कामयाबी का श्रेय माता-पिता और परिवार को दिया, वहीं दिवंगत डॉ एसके मजूमदार को प्रेरणास्रोत बताया। कहा कि डॉ मजूमदार की याद में ही हॉस्पिटल का नाम एसकेएम हॉस्पिटल रखा है। इस प्रकार बेहद साधारण परिवार में जन्म लेकर भी कुश ने डॉक्टर बनकर पिता का नाम रोशन किया है। संवाद
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