लखीमपुर खीरी। मंडी में सालों से चली आ रही उल्टी बोली की परंपरा टूटने का नाम नहीं ले रही है। मंडी की सभापति से लेकर सचिव तो मामले से अनभिज्ञता ही जता रहे हैं। कुछ किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उल्टी बोली से जुटाई गई रकम में से अधिकारियों का भी हिस्सा जाता है। इसलिए कार्रवाई नहीं होती।
राजापुर मंडी में लगाई जा रही उल्टी बोली को लेकर किसानाें को घाटा उठाना पड़ रहा है। रोज ही मंडी में इस तरह की गतिविधियां हो रही हैं, जबकि मंडी के अधिकारी इससे अनभिज्ञ हैं। किसानों का आरोप है कि जब मंडी सचिव कार्यालय से बाहर निकल किसानों का हाल जानने के लिए आएंगे, तभी इस बात की जानकारी हो सकेगी। आढ़तों पर वैसे भी किसानों की मेहनत पर पानी फेरा जा रहा है। किसानों की दोगुनी आय करने की मंशा भी फेल होती जा रही है।
मंडी की क्रय नीति की बात करें तो आढ़तों पर जिस समय बोली लगाई जाये उस समय खाद्य विभाग सहित मंडी का एक कर्मचारी की मौजूदगी जरूरी होती है, लेकिन यहां पर पहले चरण से लापरवाही बरती जा रही है। मंडी के कर्मचारी अपने कार्यालय में बैठकर खानापूरी करते हैं। उल्टी बोली लगाये जाने की वजह से किसानों को उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। नाम न छापने की शर्त पर एक व्यापारी का कहना था कि बोली लगने से पहले राइस मिलर्स और अन्य खरीददारों के बीच बैठक करते हुए मूल्य पर चर्चा होती है। साथ ही यह भी तय होता है कि कितने मूल्य में फसल की बोली लगाई जाएगी।
वर्जन
वीडियो के माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। जल्द ही वह निरीक्षण करते हुए लापरवाही करने वाले अधिकारी और आढ़तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अर्चना ओझा एसडीएम-सभापति