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Lakhimpur Kheri News: महिला सुरक्षा में चूक अस्पताल प्रशासन के लिए खतरे की घंटी

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ओयल। जिला चिकित्सालय ने पश्चिम बंगाल में महिला डॉक्टर के साथ हुई बर्बरता से कोई सबक नहीं लिया। जिला अस्पताल में आने वाली महिलाओं व तीमारदारों के लिए किसी प्रकार के सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए हैं। अस्पताल के पास सुरक्षा के नाम पर बिना शस्त्र के महज 12 होमगार्ड व 25 अन्य पुरुष सिक्योरिटी गार्ड हैं।
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जिला अस्पताल को एमसीएच विंग में संचालित हुए करीब चार वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक यहां एक भी महिला सुरक्षाकर्मी की तैनाती नहीं की जा सकी है। एमसीएच विंग स्थित जिला अस्पताल में प्रतिदिन एक हजार से अधिक महिलाओं का आवागमन होता हैं। जिला अस्पताल, एमसीएच विंग व मेडिकल कॉलेज को मिलाकर 15 डॉक्टरों समेत करीब 100 की संख्या में महिला स्टाफ है, जो कि तीन चरणों में 24 घंटे अस्पताल में कार्य करती हैं।
ओपीडी के समय पर्चा काउंटर, डॉक्टरों के ओपीडी कक्ष, पैथालॉजी लैब, एक्सरे-अल्ट्रासाउंड कक्षों के सामान सुबह से ही महिलाएं लाइनों में लग जाती हैं। कई बार महिलाओं में झगड़े तक की नौबत आ जाती है। महिला सुरक्षाकर्मी न होने से उन्हें शांत कराने में पुरुष सुरक्षा कर्मियों व स्टाफ के पसीने छूट जाते हैं। अस्पताल के पास एक भी महिला सुरक्षाकर्मी न होने का खामियाजा कई बार ड्यूटी कर रही महिला स्टाफ भी भोग चुकी हैं।
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दो सौ बेड के अस्पताल में रात्रि के दौरान भर्ती मरीजों व उनके तीमारदारों, महिला स्टाफ समेत करीब 150-200 महिलाएं मौजूद रहती हैं, जो महिला सुरक्षाकर्मी न होने से असुरक्षित महसूस करती हैं। अस्पताल के वार्डों में कोई भी बेरोकटोक आ-जा सकता है। इस दौरान कुछ नशेड़ी व खुराफाती तत्व भी पहुंच जाते हैं। अस्पताल के पास महिला सुरक्षा के इंतजाम न होना कभी भी खतरनाक स्थित पैदा कर सकता है।
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एमसीएच विंग की सीएमएस समेत हैं 15 डॉक्टर
रेगुलर स्टाफ नर्स 12, संविदा नर्सिंग स्टाफ 21, एमसीएच विंग की 33 स्टाफ नर्स, सफाई कर्मी दो, ठेका सफाई कर्मी नौ।

सुरक्षाकर्मियों की संख्या
पुरुष होम गार्ड 12, पुरुष सिक्योरिटी गार्ड 25, महिलाओं के लिए रिजर्व वार्ड, 32 बेड का महिला जनरल वार्ड, 36 बेड का महिला सर्जिकल वार्ड
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इन वार्डों में भी 80 फीसदी होती हैं महिलाएं
30 बेड का चिल्ड्रेन वार्ड, 10 बेड का पीआईसीयू वार्ड, 10 बेड का एनआरसी वार्ड।
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