लखीमपुर खीरी। कुष्ठ रोग की रोकथाम के सरकार भले ही दावे कर रही हो, लेकिन जिले में प्रतिदिन औसतन एक मरीज में इस रोग की पुष्टि हो रही है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से अब तक 115 मरीज सामने आ चुके हैं। इनको मिलाकर कुल 200 मरीज पूरे जिले में हैं।चिकित्सकों का कहना है कि कई मामलों में लोग लापरवाही बरतते हैं। काफी देर होने के बाद अस्पताल आते हैं, ऐसे में उनकी समस्या और बढ़ जाती है।
जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपेंद्र गौतम ने बताया कि यह रोग बहुत ही धीमी गति से फैलता है। इसके लक्षण विकसित होने में कई साल लग जाते हैं। इसलिए हल्का सा भी लक्षण दिखने पर चिकित्सक से परामर्श जरूर लें। इसमें देर न करें।
जिला अस्पताल में मरीजों की जांच और इलाज की सुविधा है, इसलिए सीएचसी से भी यहां मरीजों को रेफर किया जाता है। कुष्ठ रोग में दर्द नहीं होता है, इसलिए लोग लापरवाही कर जाते हैं। ऐसे में उनकी समस्या बढ़ जाती है। लापरवाही करने पर मरीज के उस हिस्से पर सुन्न व अपंगता का खतरा भी बना रहता है।
ये हैं लक्षण
-हल्के गहरे रंग के निशान पड़ जाते हैं। उस जगह पर खुजली नहीं होती व फफोले पड़ जाते हैं। कभी-कभी गांठ भी पड़ जाती है। हाथों, पैरों और त्वचा के अन्य क्षेत्रों में सुन्नता आने लगती है।
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इतने समय में ठीक होता है मरीज
कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. सत्य प्रकाश मिश्रा ने बताया कि मरीजों की जांच के बाद पता चलता है कि उसका रोग किस स्टेज पर है। अगर शरीर पर एक ही निशान है। शुरुआत ही इसका पता चल जाए तो सिर्फ चिकित्सक से मिलकर एक बार में ही यह सही हो जाता है। गंभीर मामलों में डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के हिसाब से छह माह से लेकर एक साल तक इसका इलाज चलता है। हालांकि, चिकित्सकों का मानना है कि मरीज को शुरुआती लक्षण में चिकित्सक का दिखा लेना चाहिए, नहीं तो अपंगता और सुन्नता होने के बाद इसका इलाज कठिन हो जाता है।