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अब भी न चेते तो तराई से भी गायब हो जाएगी तरावट

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नगरिया झील।
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खतरा : जिले में साल दर साल नीचे खिसकता जा रहा है भूगर्भ जलस्तर
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हमेशा पानी और परिंदों से भरी रहने वाली नगरिया झील मार्च में ही लगी सूखने
बेहतर प्रबंधन न होने से अतिक्रमण के कारण जलाशयों का अस्तित्व संकट में
लखीमपुर खीरी। नदियों, झीलों, तालाबों की बहुलता वाले तराई क्षेत्र से भी तरावट गायब हो रही है। हमेशा पानी और परिंदों से भरी रहने वाली नगरिया झील मार्च में ही सूखने लगी है। मैनहन गांव के कबुलहा ताल पानी सूख जाने से तलहटी नजर आने लगी हैं। रमियाबेहड़ की झील में पानी कम हो गया है। मनरेगा के तहत खोदे गए आदर्श तालाब सूखकर बच्चों के खेल का मैदान बन गए हैं।
सरकारी रिकार्ड में भले ही जिले में 2223 वेटलैंड हों, लेकिन तराई की धरती से तरावट गुम होती जा रही है। तराई के खीरी जिले में भी पानी का संकट गहराने लगा है। यह तब है जब इस जिले में 188 नदी-नाले हैं। दो हजार से अधिक छोटे-बड़े जलाशय हैं।
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जिले के तालाब-पोखर सूख जाने और नदियों का जलस्तर घटने से पशु-पक्षियों के लिए पानी का संकट पैदा होने लगा है। भूगर्भ जलस्तर नीचे जाने से हैंडपंपों और ट्यूबवेलों की बोरिंग फेल हो रही हैं। फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को गहरा गड्ढा खोदकर उसमें इंजन रखना पड़ रहा है। बावजूद इसके इंजन पानी नहीं दे रहे हैं।
भूजल स्तर सामान्य रूप से तीन से चार मीटर नीचे होना चाहिए, जबकि खीरी जिले के पसगवां, मोहम्मदी, बेहजम और मितौली में जलस्तर पांच मीटर से नीचे पहुंच गया है, जो खतरे का संकेत है। ग्राउंड वाटर डिपार्टमेंट के अनुसार अच्छी बात यह है कि अब तक जिले के किसी भी ब्लॉक के डार्क जोन में जाने की स्थिति नहीं आई है।

जिले में वेटलैंड की स्थिति
जिले में कुल वेटलैंड 2223
वेटलैंड का क्षेत्रफल 38119 हेक्टेयर
प्राकृतिक वेटलैंड 493
नदी-नालों की संख्या 188
झीलें 12
छोटे तालाब 1673
सीपेज एरिया 43

जलाशयों पर अतिक्रमण से गिर रहा भूगर्भ जलस्तर
तालाबों, झीलों और नदियों में अतिक्रमण, उनमें खेती और आबादी बस जाने से भूगर्भ जलस्तर में गिरावट आ रही है। यह अतिक्रमण बाढ़ का कारण भी बन रहा है। पहले बरसात के मौसम में जब बड़ी नदियों का जलस्तर बढ़ता था तो उनका पानी सहायक नदियों, नालों और तालाबों में जाता था, जिससे बाढ़ का असर कम हो जाता था। अब सहायक नदियों-नालों का अस्तित्व खत्म होने से बाढ़ का पानी खेतों में फैल जाता है और फसलें बर्बाद होती हैं।

जलाशयों के संरक्षण के छिटपुट प्रयास, लेकिन नहीं सुधरे हालात
जलाशयों के संरक्षण के छिटपुट प्रयास जरूर हुए, लेकिन हालात नहीं सुधर सके हैं। गोमती संरक्षण के लिए नेचर फोटोग्राफर सतपाल सिंह के नेतृत्व में पिछले कई वर्षों से गोमती बचाओ अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि इसमें ज्यादा सफलता नहीं मिल सकी, लेकिन लोगों में कुछ जागरूकता पैदा अवश्य हुई है। धीरे-धीरे लोग अभियान से जुड़ रहे हैं। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में नदी संरक्षण की मुहिम रंग लाएगी।
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भारत सरकार और केंद्रीय भूजल बोर्ड की गाइडलाइन के मुताबिक, यदि किसी क्षेत्र में भूजल दोहन 70 फीसदी से कम है तो सुरक्षित माना जाता है। 70 से 90 फीसदी दोहन सेमी क्रिटिकल श्रेणी में आता है। 90 से 100 फीसदी दोहन को क्रिटिकल माना जाता है। खीरी जिले के किसी भी ब्लॉक में 70 फीसदी से अधिक जल दोहन नहीं हो रहा है। इसके चलते जिले का कोई भी ब्लॉक डार्क जोन में नहीं है, लेकिन जल संरक्षण के लिए जागरूकता जरूरी है।
- अनुपम श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता, ग्राउंड वाटर डिपार्टमेंट, लखनऊ
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