लखीमपुर खीरी। महिलाओं को समूहों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने पर सरकार का विशेष फोकस है, लेकिन बैंक उसमें बाधा उत्पन्न कर रही हैं। जिले की अधिकांश बैंक समूहों के सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) पास करने में आनाकानी करती हैं, जिससे उनको ऋण नहीं मिल पा रहा। बैंकों से कुछ फाइलें पास भी कर दी जाती, लेकिन उनके खातों में ऋण का पैसा नहीं भेजा जाता है, जो बाद में वह खाते बंद हो जाते हैं।
सीसीएल की फाइलें पास न होने से समूह की महिलाएं तो परेशान हैं, साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अफसरों के आगे लक्ष्य पूरा करने की चुनौती है। जबकि मिशन की ओर से लगातार बैंकों को पत्राचार किए जाते हैं। खास बात यह कि जिला प्रशासन ने भी जिले के प्रत्येक बैंक शाखा प्रबंधकों को भी कई बार पत्र जारी किए जा चुके हैं, फिर भी काम आगे नहीं बढ़ रहा है। सीसीएल की फाइल पास होने पर समूह को 1.50 लाख रुपये का ऋण दिया जाता है। अगर समूह ऋण का पैसा एक साल में बैंक को वापस कर देता है, तो उसको अगले साल तीन लाख का ऋण मिलता है। वह भी चुकाने पर तीसरे साल में छह लाख रुपये तक ऋण दिए जाने की व्यवस्था है।
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समूहों को इन कार्यों के लिए मिलता है ऋण
सीसीएल से मिलने वाले ऋण से समूह की महिलाएं पशुपालन, परचून की दुकान, माइक्रोनी, मसाला, निरमा आदि विभिन्न कार्य कर सकती हैं। इस पैसे से महिलाएं अपने उधारी निपटा सकती हैं। अपने अन्य जरूरी काम कर सकती है। बशर्तें उनको समय पर बैंक को पैसा लौटाना होता है।
2500 खातों में नहीं भेजा पैसा, 1800 हो चुके बंद
विभागीय आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में 9964 सीसीएल का लक्ष्य है, जिसमें अगस्त तक 4152 सीसीएल बैंकों को करना अनिवार्य है। छह अगस्त तक बैंकों ने 2271 सीसीएल किया है। सीसीएल होने पर समूह के खातों में 1.50 लाख ऋण के रूप में भेजना होता है, लेकिन वित्तीय वर्ष 2024-25 1800 व 2025-26 में 600 खातों में एक भी पैसा नहीं भेजा। पैसा न भेजने पर पिछले वित्तीय वर्ष के 1800 खाते बंद भी हो चुके हैं।
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बैंकों व सीसीएल पर एक नजर
बैंक का नाम- लक्ष्य- अब तक सीसीएल
इंडियन बैंक- 4329- 497
आर्यावृत- 3494- 951
पीएनबी- 557- 40
पंजाब एंड सिंध- 305- 115
एसबीआई- 302- 89
यूनियन बैंक- 203- 05
बीओबी- 201- 65
बैंक ऑफ इंडिया- 87- 22
केनरा बैंक- 51- 02
सेंट्रल बैंक- 39- 01
इंडियन ओवरसीज- 39- शून्य
सहकारी बैंक- 351- 36
यूको बैंक 07- 12- लक्ष्य से अधिक किया।
-नोट: सीसीएल का यह आंकड़ा दो अगस्त का है।
वर्जन
सीसीएल करने में जिले की बैंके आनाकाना करती हैं। कई बार बैंकों को पत्राचार किया जा चुका है। जिलाधिकारी की ओर से भी कई बार प्रत्येक शाखा प्रबंधकों को पत्र जारी हो चुके हैं।
-जितेंद्र मिश्रा, डीसी, एनआरएलएम