जेल में निरुद्ध महिला बंदियों को स्वावलंबी बनाने के लिए गुरुवार की शाम डीएम किंजल सिंह ने नया सवेरा योजना के तहत रिसाइकिलिंग प्लांट का उद्घाटन किया। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत शुरू हुई इस योजना में महिलाओं को उनकी रुचि के मुताबिक स्वयं सहायता समूह बनाकर सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटीशियन, कंप्यूटर आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। रिसाइकिलिंग प्लांट लगने के बाद अब महिलाएं फाइल कवर समेत कार्यालयों में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं का निर्माण करेंगी। महिला बैरक में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम में डीएम किंजल सिंह ने कहा कि महिला बंदियों को फाइल कवर बनाने के लिए कच्चा माल भी कारागार में ही उपलब्ध कराया जाएगा और यहां उत्पादन के बाद इसकी सप्लाई पूरे प्रदेश में की जाएगी। डीएम ने कहा कि तिहाड़ जेल में ब्रेड बन रही है, विदेशों की जेलों में भी तमाम काम हो रहे हैँ, इसी तरह खीरी की जेल में भी रिसाइकिलिंग प्लांट के जरिए न सिर्फ यहां कच्चा माल तैयार होगा, बल्कि फाइल कवर भी बनेंगे। जिसकी सप्लाई पूरे प्रदेश में की जाएगी। इस तरह यह प्रदेश के नंबर वन जेल होगी। कारागार में डीएम ने महिला बंदियों का उत्साह बढ़ाया और उनके साथ मोमबत्ती जलाकर फोटो भी खिंचवाई। डीएम ने प्लांट लगाने के लिए नगर पालिका के ईओ अवनींद्र कुमार की तारीफ की। साथ ही महिला बंदियों से यह अपेक्षा की जब वह कारागार से छूट कर अपने घर जाएंगी तो वह इतना हुनरमंद हो चुकी होंगी कि उन्हें सहारे की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस दौरान ज्वांइट मजिस्ट्रेट अंकित अग्रवाल, ईओ अवनींद कुमार, एसडीएम नागेंद्र सिंह, वरिष्ठ कोषाधिकारी एसके शर्मा, जेल अधीक्षक विनोद कुमार, पूर्ति निरीक्षक श्रद्धा श्रीवास्तव, बीडीओ सदर अजय पांडे जेलर ज्ञानप्रकाश समेत तमाम अधिकारी थे।
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महिला बंदियों को उनके गांव में भी मिलेगा फायदा
बीडीओ सदर अजय पांडे ने बताया कि महिला बंदियों को स्वावलंबी बनाने के लिए 21 मई को अंजलि और ज्योति नामक दो स्वयं सहायता समूह बनाए थे। जिसके अंतर्गत समूह बनाकर महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है। जब महिलाएं यहां से छूटकर अपने गांव जाएंगी तो उनका वहां के स्वयं सहायता समूह में शामिल किया जाएगा। अगर वहां समूह नहीं होगा तो नया समूह बनाया जाएगा।