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वित्तविहीन शिक्षकों ने डीआईओएस  को बनाया बंधक, दफ्तर में जड़ा ताला

Mon, 03 Jul 2017 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो       लखीमपुर खीरी। 
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प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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मानदेय बंद होने से आक्रोशित शिक्षकों ने किया धरना, प्रदर्शन
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कई घंटे कर्मचारियों सहित कार्यालय में कैद रहे डीआईओएस       
      
वित्तविहीन शिक्षकों ने मानदेय सहित कई समस्याओं से आक्रोशित होकर सोमवार को डीआईओएस दफ्तर पर प्रदर्शन किया। शिक्षक डीआईओएस को बंधक बनाते हुए कार्यालय गेट में ताला डालकर धरने पर बैठ गए। तीन घंटे से अधिक देर तक चले प्रदर्शन के दौरान डीआईओएस कर्मचारियों सहित कार्यालय में कैद रहे। जिलाध्यक्ष ने दोपहर बाद ताला खोलकर डीआईओएस को ज्ञापन सौंपा और प्रदर्शन खत्म किया।      
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत वित्तविहीन शिक्षक महासभा के जिलाध्यक्ष कुलवंत सिंह चीमा के नेतृत्व में शिक्षक सोमवार की सुबह नौ बजे ही डीआईओएस कार्यालय जा पहुंचे। डीआईओएस और कर्मचारियों के कार्यालय में घुसते ही जिलाध्यक्ष ने करीब 9.30 बजे गेट में ताला जड़ दिया और नारेबाजी करने लगे। हालांकि डीआईओएस डॉ. ओपी गुप्ता ने शिक्षकों से बात करने की कोशिश की, लेकिन शिक्षकों ने उनकी एक न सुनी। तीन घंटे से अधिक चले धरना प्रदर्शन के दौरान डीआईओएस और उनके कर्मचारी कार्यालय में ही बंद रहे। जिलाध्यक्ष ने दोपहर करीब एक बजे ताला खोलकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीआईओएस को सौंपा। जिलाध्यक्ष ने बताया कि यह प्रदर्शन केवल चेतावनी था, यदि योगी सरकार मानदेय बंद करती है तो वित्तविहीन शिक्षक सड़कों पर उतरकर जेल भरो आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। इस दौरान रविंद्र श्रीवास्तव, हौसला प्रसाद मिश्रा, राम कृष्ण, मयंक मोहन दीक्षित, संजय गुप्ता, अनुपम मिश्रा, राजेश्वरी गुप्ता, सुशीला देवी, हीना खान, शशिबाला श्रीवास्तव, प्रहलाद कुमार सहित कई शिक्षक मौजूद रहे।
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खिड़कियों से चला काम      
मेन गेट पर ताला जड़ने के बाद वहीं पर धरना प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों के कारण विभागीय काम के लिए आए स्कूल और कॉलेजों के बाबुओं को खिड़की के रास्ते जरूरी कागजात कर्मचारियों और अधिकारियों तक पहुंचाने पड़े।      
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यह हैं मांगे      
1. 7 (क) जैसी त्रुटि पूर्ण मान्यता की धारा में संशोधन हो, समान विद्यालय, समान शिक्षा के तहत समान वेतनमान लागू हो, हास्यापद मानदेय को बढ़ाकर पांच अंकों में किया जाए, 2010 की मान्यता के बाद के शिक्षकों को भी मानदेय दिया जाए, अप्रशिक्षित शिक्षकों को प्रशिक्षण की छूट देकर मानदेय दिया जाए, प्रधानाचार्य, शिक्षक व कर्मचारियों को ईपीएफ व बीमा का लाभ और माध्यमिक शिक्षकों को सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड की तरह सेवा चयन आयोग में अनुभव का लाभ दिया जाए।
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