जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने लिखा पत्र
लखीमपुर खीरी। धान खरीद सीजन की ठीक से शुरुआत भी नहीं हुई थी कि उससे पहले बेमौसम बारिश से हजारों एकड़ धान की फसल बर्बाद हो गई है, जो फसल बची है उसकी भी गुणवत्ता प्रभावित हुई है। ऐसे में किसानों का धान क्रय केंद्र पर खरीदने में मानक आड़े आ रहे हैं। इस समस्या से निपटने के लिए डिप्टी आरएमओ लालमणि पांडेय ने शासन को पत्र लिखकर भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानक में ढील देने की मांग की है। साथ में किसानों का धान चेक करके गुणवत्ता रिपोर्ट भी भेजी है।
जनपद में तीन अक्तूबर से नौ अक्तूबर 2021 तक तिकुनिया कांड के चलते इंटरनेट सेवाएं बाधित रही थीं। इसके बाद मूसलाधार बारिश और आंधी के कारण धान की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई। इससे धान में नमी की मात्रा तय मानक से काफी अधिक पाई जा रही है।
मंडियों में लगी धान की ढेरियों का गुणवत्ता विश्लेषण क्षेत्रीय विपणन अधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी द्वारा कराया गया, जिसमें कार्बनिक तत्व मानक एक प्रतिशत के सापेक्ष तीन प्रतिशत, बदरंग व अंकुरित दानों की मात्रा मानक पांच प्रतिशत के सापेक्ष 12 प्रतिशत, अपरिपक्व व संकुचित दानों की मात्रा मानक तीन प्रतिशत के सापेक्ष 10 प्रतिशत, अधोमानक प्रजाति का अपमिश्रण की मात्रा मानक छह प्रतिशत के सापेक्ष छह प्रतिशत मिली है। नमी भी मानक 17 प्रतिशत के सापेक्ष औसतन 18 प्रतिशत मिली है। कुछ में 20 प्रतिशत से भी अधिक नमी पाई गई है। डिप्टी आरएमओ लालमणि पांडेय ने बताया कि एफसीआई व खाद्य विभाग की संयुक्त रिपोर्ट शासन को भेजकर मानक में ढील देने की मांग की गई है, जिससे किसानों को काफी सहूलियत मिलेगी। वहीं क्रय केंद्र प्रभारी भी आसानी से भयमुक्त होकर धान खरीद सकेंगे।
पांच मंडियों में नहीं हो रही धान की नीलामी, किसान नाराज
लखीमपुर खीरी। जनपद के किसानों से धान खरीद के लिए करीब 150 क्रय केंद्र खोले गए हैं, जिसमें करीब 50 प्रतिशत क्रय केंद्र मंडियों में खुले हैं। फिर भी किसानों को राहत नहीं मिल पा रही है, जिसका बड़ा कारण गोला, मोहम्मदी, मैगलगंज, पलिया और तिकुनिया में आढ़तियों द्वारा नीलामी शुरू न किया जाना है। इससे किसानों की पूरी तरह निर्भरता क्रय केंद्रों पर है, जहां पर मानकों की अड़चन आड़े आ रही है।
पहले मोहम्मदी फिर मैगलगंज में किसानों द्वारा धान जलाने की घटनाएं हो चुकी हैं वहीं किसानों व अधिकारियों के बीच नोकझोंक की स्थिति उत्पन्न हो रही है। क्रय केंद्रों पर किसानों का धान न खरीदे जाने की शिकायतें आम हो रही हैं तो वहीं क्रय केंद्र प्रभारी धान की गुणवत्ता मानक के अनुरूप न होने पर रिजेक्ट कर रहे हैं। ऐसे में किसानों और केंद्र प्रभारियों के बीच टकराव की नौबत उत्पन्न हो रही है।
धान को रिजेक्ट किए जाने के बाद केंद्र प्रभारी पल्ला झाड़ लेता है, जबकि शासन ने क्रय नीति में व्यवस्था की है कि किसान का धान रिजेक्ट होने पर क्षेत्रीय विपणन अधिकारी की देखरेख में किसान के धान की नीलामी कराई जाएगी। नीलामी में किसानों को उचित मूल्य दिलाने के निर्देश दिए गए हैं। यदि नमी ज्यादा होने की समस्या है तो उस धान को सुखाने के बाद क्रय केंद्र पर ही धान खरीदने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन लखीमपुर की राजापुर मंडी को छोड़कर अन्य पांच मंडियों में हालात शासनादेश के उलट दिखाई दे रहे हैं।
गोला, मोहम्मदी, मैगलगंज, पलिया और तिकुनिया मंडी में किसानों के धान की नीलामी की कोई प्रक्रिया ही नहीं कराई जा रही है और न ही आढ़ती मंडी में आए किसानों का धान खरीदते हैं। इससे किसानों के सामने दोहरी समस्या पैदा हो गई है, जिससे उनमें नाराजगी है।
डिप्टी आरएमओ लालमणि पांडेय ने बताया कि लखीमपुर को छोड़कर अन्य पांच मंडियों में आढ़तियों द्वारा नीलामी नहीं की जा रही है और न ही व्यापारी मंडी में धान खरीद रहे हैं। इससे क्रय केंद्र पर धान रिजेक्ट होने की दशा में किसानों को दूसरा विकल्प नहीं मिल पा रहा है।
क्रय केंद्रों पर रिजेक्ट होने वाले धान की नीलामी कराकर किसानों को उचित मूल्य दिलाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए मंडियों में सचिव की जिम्मेेदारी तय की गई है। पांच मंडियों में नीलामी प्रक्रिया न कराए जाने की जानकारी नहीं है। मामला संज्ञान में आया है, जांच कराकर उचित समाधान कराया जाएगा। - संजय कुमार सिंह, एडीएम