अमीरनगर। स्वाद में तीखी पर किसानों के जीवन में हरी मिर्च की खेती मुनाफे की मिठास घोलेगी। देवरिया गांव के प्रगतिशील किसान इरफान खां और एहरान खां का नवाचार रंग लाया तो एक ही खेत में दो फसलों से उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि होगी।
उन्होंने दो एकड़ भूमि में ट्रेंच विधि से गन्ने की फसल ली। सहफसल में मिर्च तैयार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि गन्ना लंबे समय वाली फसल है। मिर्च जैसी फसल को लगाने से 90 दिनों के भीतर अतिरिक्त आमदनी होगी। मिर्च की फसल के बाद उसके पौधों को खेत में ही गलाकर कंपोस्ट खाद के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता और जैविक गुणवत्ता में सुधार होगा।
एहरान खां ने बताया कि खेत की तैयारी में देसी खाद और जैविक तत्वों का प्रयोग किया है। गन्ने की अर्ली नई वेराइटी, 2016 को करनाल से मंगाकर ट्रेंच विधि से बोआई की है। 1039 प्रजाति की शिमला और हरी मिर्च के पौधों को तैयार कर उसी खेत में लगाया गया है।
खेतों में रसायनिक खाद का प्रयोग न कर जैविक खाद, ट्राइकोडर्मा और सूडोमोनास जैसे फफूंदनाशक तत्वों का उपयोग किया है।
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गन्ने की फसल को बढ़ने में करीब 10 से 12 महीने लगते हैं, जबकि मिर्च की फसल मात्र तीन महीने में बाजार में पहुंच जाती है। इससे गन्ने की देखरेख के दौरान भी किसान को लगातार आमदनी का स्रोत बना रहता है।
इरफान खां, किसान
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अगर नई तकनीक और जैविक विधि को अपनाएं तो आय दोगुनी करना कोई मुश्किल काम नहीं है। यह प्रयोग इस विश्वास के साथ शुरू किया है कि गन्ने की फसल के साथ सहफसल मिर्च की खेती करने से उत्पादन बढ़ेगा और जमीन उपजाऊ रहेगी।
-एहरान खां, किसान
जिले के किसान अब धीरे-धीरे पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नई तकनीकी से खेती करना शुरू कर रहे हैं। इससे किसानों की अच्छी आय होती है। अन्य किसानों को भी नई तकनीकी से जुड़ना चाहिए।
-गिरीश चंद्र, उप कृषि निदेशक
अमीरनगर देवरिया गांव में गन्ने के साथ मिर्च की खेती। स्रोत संवाद
अमीरनगर देवरिया गांव में गन्ने के साथ मिर्च की खेती। स्रोत संवाद