बांकेगंज। बारिश के मौसम में जिले के तालाबों और नालों में मगरमच्छों की आमद बढ़ गई है। तालाबों के पास मवेशी चराने और चारा लेने जाने वाले लोगों पर हमलावर हो रहे हैं। ये कई लोगों को घायल कर चुके हैं।
हाल में हुई बारिश से सूखे पड़े तालाबों और नालों में पानी भर गया है। भीषण गर्मी में पानी के अभाव में जो मगरमच्छ इधर-उधर भटक रहे थे उन्होंने फिर इन तालाबों में अपना बसेरा बना लिया है। इससे गांव के पास तालाबों और नालों के किनारे मवेशी चराने या चारा लेने जाने वाले ग्रामीणों और मवेशियों पर यह मगरमच्छ घात लगाकर हमला कर उन्हें घायल कर रहे हैं।
यही नहीं पालतू पशुओं पर हमला कर उन्हें अपना निवाला बना रहे हैं। बीते एक हफ्ते में मगरमच्छ दो ग्रामीणों को घायल कर चुके हैं। बीते बुधवार को धौरहरा के कफारा गांव में नाले के किनारे शौच करने गए 17 वर्षीय हेमराज, इसके दो दिन बाद उल्ल नदी के किनारे शौच करने गए सैदापुर देवकली निवासी युवक रामकुमार पर मगरमच्छ ने हमला कर घायल दिया। वहीं शुक्रवार को भीरा के दौलतापुर गांव में तालाब से निकले मगरमच्छ ने वहां चर रही बछिया पर और घूम रहे कुत्ते पर हमला कर उन्हें अपना निवाला बना डाला।
तालाबों के किनारे अक्सर लोग अपने मवेशी चराने जाते हैं। कई बार पालतू पशुओं को नहलाने के लिए लोग तालाबों और नालों में घुस जाते हैं। उनके लिए भी यह खतरनाक साबित हो गए हैं। जिले के तालाबों और नालों में मगरमच्छ की मौजूदगी से लोग दहशत में हैं। इससे लोग तालाब और नालों के किनारे मवेशी चराने जाने से भी अब डरने लगे हैं। यहां तक कि तालाबों में मछली पालक शिकार करने से डरने लगे हैं।
नदियों के जरिए तालाबों में आते हैं मगरमच्छ
जिले के तालाबों में मगरमच्छ शारदा और घाघरा नदियों के जरिए आते हैं। वहीं बांकेगंज, फरधान, मैलानी क्षेत्र में खीरी ब्रांच नहर में बहकर आने वाले मगरमच्छ यहां के तालाबों और कुलाबों में आते हैं। मगरमच्छों ने अपने आने-जाने का रास्ता इन नहरों और कुलाबों को बना रखा है। बरसात शुरू होने और इसके बाद तालाबों में पानी कम हो जाने पर इनका खतरा और अधिक बढ़ जाता है।
तालाबों में मगरमच्छों की बढ़ोत्तरी इस बात का संकेत है कि जिले की जैव विविधता समद्ध हो रही है। जहां के तालाबों में मगरमच्छ हैं। वहां के ग्रामीणों को सतर्क रहना चाहिए। गांव की आबादी में मगरमच्छ आने पर इसकी सूचना वन विभाग को दें, ताकि मगरमच्छों से बचाव किया जा सके और उसे सुरक्षित उसके प्राकृतवास में पहुंचाया जा सके। - संजय बिश्वाल,डीएफओ, दक्षिण खीरी वन प्रभाग