तीन साल पहले ग्रामीण की गोली मारकर की गई थी हत्या
संपत्ति विवाद में ग्रामीण की गोली मारकर हत्या करने के मामले में एडीजे बाबूराम ने दो हत्याभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही हत्यारोपियों पर 30-30 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी श्रीपाल जायसवाल ने बताया कि भीरा थाना क्षेत्र के ग्राम बेलवा मलूकापुर निवासी उमाशंकर का पुश्तैनी मकान गांव में बना हुआ था, जिसे हथियाने के सिलसिले में उसकी रंजिश गांव के दबंगों से चल रही थी। आरोप है कि 28 मई 2013 की रात साढ़े 11 बजे गांव का रूपचंद्र अपने साथी जसवंत के साथ तमंचे से लैस होकर उमाशंकर के घर घुस गया। दोनों लोग उमाशंकर को खींचकर मकान से बाहर ले जाने लगे तो उमाशंकर की पत्नी सुधा ने विरोध करते हुए शोरगुल किया। शोर-शराबा सुनकर उमाशंकर के भाई शारदा प्रसाद और पिता रघुनंदन पहुंचे और बचाने की कोशिश करने लगे। तभी दोनों हत्यारोपी गाली देते हुए उमाशंकर को घसीटकर गांव के किनारे ले गए, वहीं उमाशंकर की गोली मारकर हत्या कर दी। अभियोजन की ओर से एडीजीसी श्रीपाल ने शारदा प्रसाद, सुधा देवी, रघुनंदन, डॉ. एके चौधरी, डॉ. वीके वर्मा, एसआई आलोक राव, नरेश सिंह, कांस्टेबल मदनपाल और देवेंद्र प्रसाद की गवाही दर्ज कराई तथा बचाव पक्ष की कोई दलील नहीं लगने दी। एडीजे बाबूराम ने सुनवाई के बाद रूपचंद्र और जसवंत को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है, साथ ही दोनों पर तीस-तीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं रूपचंद्र के पास तमंचा बरामद होने के कारण उस पर दो हजार रुपये का जुर्माना अलग से लगाया है। अदालत ने पीड़ित पक्ष की सहायता के लिए अपने फैसले में यह व्यवस्था दिया है कि जुर्माना वसूली की रकम में से आधी मृतक के परिवार वालों को बतौर मुआवजा अदा की जाए।