अमर उजाला में खबर छपने के बाद पुलिस ने असम पुलिस से संपर्क साधा
अभी तस्दीक नहीं हो पा रहा किशोरी का पता
लखीमपुर पुलिस से कराई किशोरी की बात
दिल्ली से लाकर तीन बार जिले में बेची गई 16 वर्षीय किशोरी वर्तमान समय में मानसी स्वधार गृह में है। अमर उजाला में छपी खबर के बाद महिला एसओ ने असम प्रदेश की लखीमपुर पुलिस से संपर्क साधा, लेकिन किशोरी जिस मिरजान गांव की रहने वाली बता रही है, लखीमपुर पुलिस ने उस गांव के होने से साफ इंकार कर दिया है। अब उसके नाम और बिरादरी के आधार पर लड़की के घर वालों को असम पुलिस लखीमपुर थाना क्षेत्र के गांवों में तलाश कर रही है।
दो साल पहले परिवार वालों की रजामंदी से गांव के ही युवक के साथ किशोरी दिल्ली आई थी। जिस घर में वह झाडू पोछा करती थी। उस घर के लोग उसे सताने लगे तो वह एक दिन वहां से भाग निकली। उसे दिल्ली से एक महिला मिली जो उसे खीरी जिले के गोला गोकर्णनाथ ले आई थी। इसके बाद वह तीन बार बेची गई। 17 दिन पहले वह किसी तरह से लखीमपुर जीआरपी थाने पहुंची और आपबीती बताई थी। जिस पर जीआरपी ने उसे चाइल्ड लाइफ को सौंप दिया था। बीमार होने के बावजूद उसके इलाज की कोई समुचित व्यवस्था भी नहीं की और न ही उसके घर वालों का पता लगाने की जरूरत समझी गई। अमर उजाला ने पहली अगस्त के अंक में प्रथम पेज पर तीन बार बेची गई किशोरी को सिस्टम ने अपने हाल पर छोड़ा शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया था। एसपी ने खबर पर संज्ञान लेकर महिला एसओ कमर सुल्ताना को लड़की के घर वालों का पता लगाने के आदेश दिए थे। महिला एसओ ने बताया कि उन्होंने लड़की के बताए गए नाम-पते के आधार पर असम के लखीमपुर जिले की सदर पुलिस से संपर्क साधा। इसके अलावा पुलिस कंट्रोल रूम से भी बात की। असम पुलिस ने लड़की द्वारा बताए जा रहे मिरजान नामक गांव होने से इंकार कर दिया। जिस पर उन्होंने लड़की की भी वहां की लालुक चौकी पुलिस से बात कराई, लेकिन फिर भी पते की पुष्टि नहीं हो सकी है। उन्होंने बताया कि असम पुलिस का कहना है कि असम पुलिस उसके नाम और जाति के आधार पर उसकी तलाश कर रही है। उन्होंने बताया कि यदि दो दिन में घर वालों का पता नहीं चलता है तो किशोरी को नारी निकेतन भेजा जाएगा।