जिला कारागार के मुख्य गेट से साल भर पहले फिल्मी अंदाज में फरार होने वाले शातिर अपराधी रविंद्र लोध को भीरा पुलिस ने उसकी ससुराल से गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। रविंद्र पर 15 हजार रुपये का इनाम घोषित है। रविंद्र अपने साथी कुख्यात अपराधी अजय तिवारी उर्फ दद्दू तिवारी के साथ 30 जुलाई 2014 को फरार हुआ था। जिले के कई थानों में उस पर एक दर्जन संगीन मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस के मुताबिक रविंद्र लोध की ससुराल भीरा थाना क्षेत्र के ढखिया गांव में है। शनिवार को पुलिस को सूचना मिली कि रविंद्र लोध अपनी पत्नी व बच्चे से मिलने ससुराल आया है। जिसके बाद एसओ ब्रजराज यादव पुलिस फोर्स के साथ गांव पहुंचे, जहां रविंद्र घरवालों के साथ मौजूद था। पुलिस की दबिश के समय रविंद्र ने भागने की कोशिश की लेकिन उसे दबोच लिया। उसके पास से पुलिस ने एक तमंचा व छह जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। रविवार को एसपी अखिलेश कुमार चौरसिया ने प्रेसवार्ता कर पुलिस की सफलता की सराहना की। एसपी ने कहा कि फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के बाबत डीआईजी लखनऊ रेंज ने दिशा-निर्देश दिए थे, जिसके क्रम में भीरा पुलिस की सक्रियता के कारण रविंद्र लोध की गिरफ्तारी की गई। पुलिस टीम में एसओ ब्रजराज यादव के अलावा कैलाश यादव, नरेश सिंह, शैलेंद्र सिंह, अकबर हासमी, अभिषेक दीक्षित शामिल थे।
योजनाबद्ध तरीके से हुआ था फरार
बाइक लूट कर पहले देवा गया फिर पहुंचा नेपाल उसके मुताबिक जेल के अंदर अजय तिवारी ने अपने साथियों की मदद से तमंचा मंगवाया। 30 जुलाई को रोजाना की तरह जेल से कूड़ा ले जाने वाली ठेलिया जैसे ही बाहर निकलने लगी, दोनों उसके पीछे-पीछे चल दिए। गेट तक सब उनकी योजना के मुताबिक ही हुआ। जेल गेट से तमंचा लहराते हुए जैसे ही वह दोनों सड़क पर पहुंचे, एक बाइक सवार युवक मिला। जिसकी बाइक छीनकर दोनों फरार हो गए। पुलिस जब तक अलर्ट होती तब तक दोनों जिले की सीमा से दूर पहुंच गए थे। रविंद्र की माने तो वह लोग देवा (बाराबंकी) तक बाइक से गए। वहां से आगे नेपाल बार्डर है, जहां पर वह बाइक छोड़कर नेपाल में प्रवेश कर गए। रविंद्र ने बताया कि वह और अजय तिवारी नेेपाल में मजदूरी करने लगे। एक माह बाद अजय कहीं चला गया। तब से वह नेपाल में काम कर रहा था।
पुलिस के लिए फरारी बन गई थी किरकिरी
बिजुआ। जिला जेल से रविंद्र व अजय तिवारी जिस स्टाइल में फरार हुए थे वह किसी मिस्ट्री से कम नहीं थी। मामले में जेल महकमे के अफसर से लेकर कई जिम्मेदार नप गए थे। रविवार को रविंद्र ने जेल से फरार होने की कहानी बयां की।
2001 में भीरा में हुई डकैती में था शामिल
अपराधी रविंद्र लोध पर भीरा साल 2001 में एक डकैती का मुकदमा दर्ज हुआ था। भीरा थाना क्षेत्र के पड़रिया पुरवा गांव में जगदीश पांडे के घर पर 14 साल पहले लूट पाट की घटना में रविंद्र शामिल रहा था। मुकदमे में रविंद्र को सजा भी सुनाई जा चुकी है।
1995 से लेकर अब तक 13 मुकदमे
पुलिस के मुताबिक रविंद्र लोध पर सबसे पहले 1995 में गोला में डकैती के दौरान हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। उसके बाद हत्या, बलवा, यूपी गुंडा एक्ट, लूट समेत 13 मुकदमे दर्ज हुए हैं। 2005 से लेकर 2014 तक रविंद्र के ऊपर कोई मुकदमा नहीं दर्ज हुआ है।
अब तन्हाई में रखा जाएगा कैदी रविंद्र
लखीमपुर खीरी। जिला जेल से मुख्य गेट से तमंचा लहराते हुए फरार हुए रविंद्र लोध को इस बार कारागार की तन्हाई बैरक में रखा जाएगा। आम बंदियों की तरह उसकी मुलाकात पर भी पाबंदी रहेगी। साथ ही कारागार में उसकी कड़ी निगरानी की जाएगी। बता दें कि कैदी रविंद्र लोध 30 जुलाई 2014 को कुख्यात बदमाश अजय तिवारी उर्फ दद्दू तिवारी के साथ फरार हो गया था। उसके दोबारा पकड़े जाने की जानकारी मिलने के बाद रविवार को सुबह से ही कारागार प्रशासन में हलचल बढ़ गई थी। जेल अस्पताल के पास स्थिति तन्हाई बैरक को खाली करा दिया गया। इस बैरक में कैदी/बंदी को तभी रखा जाता है जब उससे कारागार की सुरक्षा व्यवस्था को किसी तरह का खतरा रहता है या वह अन्य बंदियों पर हमलावर होता है। जेलर ज्ञानप्रकाश ने बताया कि रविंद्र लोध अब आम कैदी नहीं रह गया है। एक बार वह जेल से फरार हो चुका है। दोबारा वह इसी जेल में आ रहा है। ऐसे में रविंद्र से सुरक्षा व्यवस्था को फिर खतरा उत्पन्न हो सकता है।