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मां का लाड़ला रोहित चिता पर भी मां के संग इस दुनिया से हुआ बिदा            

Fri, 07 Jul 2017 11:52 PM IST
लखीमपुर खीरी।
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dead - फोटो : amar ujala
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रोहित ने बनाया था मां एवं परिवार के साथ कुछ खुशनुमा लम्हें बिताने का प्लान            
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क्या खबर थी... आखिरी बार कर रहा है अपनी मां से जिद, कि तुम बिन नहीं जाना मां       
 
ये रोहित ही था कि मां उसकी हर जिद पूरी करती थी, छोटा था तब से और अब दो बच्चों का बाप बन गया तब भी। घर का सबसे बड़ा बेटा राहुल है बहुत ही लाडला था। वो है ना कि जो बड़ा होता है वह बहुत जिम्मेदार व गंभीर होता है, लेकिन रोहित के जन्म के बाद मां के सबसे करीब रोहित था। पिता अनिल टंडन ने जब शहर में एक कार का कारखाना शुरू किया तो उसका नाम अपने दूसरे नंबर के बेटे रोहित के नाम पर रखा। जो कि आज इस परिवार की एक बड़ी पहचान बन चुका है। क्योंकि लोग परिवार को रोहित मोटर्स के नाम से जानते हैं। रोहित जिंदगी की हर छोटी बड़ी खुशी अपने परिवार के साथ बिताना चाहता था, तभी तो 16 जून को जब लखनऊ नीलांश वाटर पार्क घूमने का प्लान बना तो मां साथ थी, अब पहाड़ों की सैर पर जाना था तब भी मां साथ थी। मंगलवार को दिन में ही रोहित ने बड़े भाई राहुल से बाहर जाने की इजाजत मांगी थी, लेकिन एक शर्त के साथ कि मां के साथ दूसरे लोग भी चलेंगे। देर शाम को गाड़ी किराए पर लेकर अपनों के साथ राहुल कुछ खुशनुमा लम्हें सुकून से बिताने हरिद्वार एवं देहरादून निकल पड़े। पहले मां तैयार नही थी लेकिन था तो राहुल ही... मां को मना लिया कि तेरे बिन मां नहीं जाना। इससे पहले 16 जून को एक दिन के लिए रोहित अपनी पत्नी बच्चे एवं भतीजों जब लेकर लखनऊ के वाटर पार्क गया था तब भी मां साथ में ही थी। इन सारे लम्हों को रोहित ने अपने फेशबुक पर संजो रखा है।       

भतीजे कांहा ने गाड़ी में सवार होते ही फेसबुक स्टेटस किया था अपडेट
लखीमपुर। राहुल का बेटा अपनी कांहा अपनी छोटी बड़ी बस खुशियां दोस्तों से शेयर करता रहता था। कांहा अभी स्कूल की पढ़ाई कर रहा है, लेकिन वह फेसबुक पर अपडेट रहता था। बुधवार को जब चाचा, मम्मी, दादी और भाई बहनों के साथ इस सफर पर निकला तो उसने रात 11.38 पर अपना स्टेटस अपडेट कर अपने फेसबुक दोस्तों से साझा किया कि ट्रेवलिंग टू देहरादून विद रोहित टंडन एंड 4 अदर। इस हादसे में कांहा बच गया है। शुक्रवार को सोशल मीडिया में कांहा टंडन को ओ ब्लड ग्रुप की आवश्यकता है, ऐसा मैसेज चलने से लोग फोन एवं व्हाट्सएप से उनके साथ खड़े नजर आए। 
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... मत रो पापा, अभी आपका सहारा हूं मैं
लखीमपुर। राहुल इस घर का बड़ा बेटा है, पूरी जिम्मेदारी उस पर है, इस हादसे में राहुल ने अपनी पत्नी एवं दो बेटों को खोया है। लेकिन राहुल को पता है कि अगर वो टूटा तो बूढ़े पापा को कौन संभालेगा। .... जब पूरा शहर अनिल टंडन को दिलासा दिलाते-दिलाते आंसू नही थाम पा रहा था, ऐसे में एक शख्स था उसे पता था कि उसके बिखरने से पापा को कोई संभालने वाला नही है।       
दो भाई, मां, पत्नी एवं एक बेटे समेत आठ लोगों में खोने वाले राहुल को अब सबसे बड़ी चिंता अपने पापा को संभालने के साथ उन लोगों को भी देखना है जो मेरठ में अस्पताल में जिंदगी एवं मौत की जंग लड़ रहे हैं। राहुल के आंसू सूखे नही हैं लेकिन पापा अनिल का चेेहरा देखकर जब्त किए है, वो जानता है कि अब अगर वह टूटा तो पापा को कौन संभालेगा।

ड्राइवर कलामुद्दीन के बेटे को अपने अब्बूू का इंतजार      
लखीमपुर खीरी। लखीमपुर के हादसे में मारे गए लोगों में नौवीं मौत गाड़ी चला रहे ड्राइवर की हुई है। वह शहर के पास छाउछ का रहने वाला है। कलामुद्दीन नाम का जो शख्स अब इस दुनिया में नही है उसके पीछे उसकी तीन साल पहले ब्याह कर लाई गई पत्नी उरुननिशा एवं दो साल का बेटा बेसहारा हो गए हैं। शुक्रवार को ड्राइवर कलामुद्दीन को भी सुपुर्दे खाक कर दिया गया।       
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कलामुद्दीन के पिता राजमिस्त्री हैं, बेटों को कुछ नही बना सके तो बेटा ड्राइवर बनकर अपनी रोजी रोटी की राह तलाश ली। तीन साल पहले उसकी जिंदगी में हमसफर बनकर आई उरुननिशा के लिए वह जीता था। अब उसके दो साल का बेटा अर्श भी है, वह जानता था कि ड्राइवर की जिंदगी जान जोखिम में रहती है। इसलिए वह अपने बच्चे को कभी ड्राइवर नही बनने देना चाहता था, इसलिए वह खुद ही दिन रात मेहनत कर इतना करना चाहता था कि कल को बेटा पढ़े और कोई अफसर बने। बुधवार को जब वह घर से निकला तो बेटे को सोता छोड़ कर चला था, अब घर आया तो बेटे को वह सोता हुुुआ मिला। बेटे को नही पता कि अब्बू उसके लिए सपने देखते देखते ही इस दुनिया से बिदा हो गए.... वह पूछता है कि पापा कहां है?
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