फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बुजुर्ग दंपति को मौत भी नहीं कर पाई जुदा

Sun, 02 Oct 2016 12:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बेलरायां (खीरी)।
विज्ञापन
विज्ञापन
पति की मौत के आधे घंटे बाद पत्नी ने भी ली अंतिम सांस
विज्ञापन

एक अर्थी पर निकली दोनों की शव यात्रा
एक ही चिता पर बड़े पुत्र ने दी मुखाग्नि
शादी में सात फेरे लेते समय जिंदगी भर का साथ निभाने के किए गए बुजुर्ग दंपति के वादे को मौत भी जुदा नहीं कर सकी। करीब ढाई महीने से बीमार चल रहे ग्राम भेड़ौरी निवासी 77 वर्षीय सीताराम की पितृ विसर्जन के बाद शुक्रवार की रात मौत हो गई। पति की मौत के आधे घंटे के भीतर उनकी पत्नी बल्लो देवी ने भी अंतिम सांस ले ली। एक ही अर्थी पर दोनों के शवों की अंतिम यात्रा निकाली गई और गांव के ही मुक्तिधाम पर एक ही चिता पर ज्येष्ठ पुत्र ने मुखाग्नि दी। 
विज्ञापन

ग्राम भेड़ौरी निवासी कमलेश कुमार ने बताया कि पिता सीताराम करीब छह महीने से बीमार चल रहे थे। उनका बेलरायां, सिंगाही, निघासन के अलावा पीलीभीत, लखनऊ में भी इलाज कराया गया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। डेढ़ महीने से पिता की आवाज भी बंद हो गई थी। करीब महीने भर से उन्होंने अन्न भी त्याग दिया था। फल-दूध और पानी पीकर जीवन काट रहे थे। पिता के खाना छोड़ने पर मां बल्लो देवी ने भी 15 दिन पहने अन्न खाना बंद कर दिया। शुक्रवार को पितृ विसर्जन के बाद पिता सीताराम ने इशारे से नहलाने को कहा। पिता को जब नहलाया गया तो मां बल्लो देवी ने भी स्नान किया। इसके बाद इशारों में पिता दुनिया छोड़ने की बात करते रहे, जिस पर मां ने भी कहा कि हम भी साथ में ही चलेंगे। शुक्रवार की रात करीब 9.30 बजे सीताराम ने दम तोड़ दिया। पिता की मौत होते ही घर में कोहराम मच गया। रोते-बिलखते मां ने भी पिता की मौत के आधे घंटे के भीतर शरीर त्याग दिया। पति-पत्नी की कुछ ही देर में हुई मौत की खबर से गांव के लोग स्तब्ध रह गए। शनिवार की सुबह एक ही अर्थी पर दोनों शव रखकर अंतिम यात्रा निकाली गई। गांव के बाहर स्थित मुक्तिधाम पर एक ही चिता पर दोनों को लिटाया गया। ज्येष्ठ पुत्र कमलेश कुमार ने माता-पिता को मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में काफी संख्या में लोग मौजूद रहे। 
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें