पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। दुधवा नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर मनोज कुमार सोनकर पर दर्ज कराई गई रिपोर्ट को पुलिस के जांच के बाद निरस्त करने के मामले में विधायक रोमी साहनी खासे नाराज हैं। उनका कहना है कि वह किसी गरीब के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। इस मामले में पुलिस अधिकारियों से वार्ता कर रिपोर्ट को निरस्त किए जाने के कारणों को जानेंगे इसके बाद अगला कदम उठाएंगे।
एक अगस्त को थारू समुदाय और वन विभाग के बीच सेड़ा-बेड़ा में तनातनी हुई थी। ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम का घेराव भी किया था। गौरीफंटा पुलिस ने आकर वहां से डिप्टी डायरेक्टर और अन्य कर्मियों को निकाला था। ग्रामीणों का आरोप था कि डिप्टी डायरेक्टर और उनके साथ पहुंची वन विभाग की टीम ने एक बकरी को कब्जे में ले लिया तो एक व्यक्ति को पकड़कर बंद कर दिया। ग्रामीणों का आरोप था कि उनके साथ अभद्रता भी की गई। बाद में बकरी मिलने और पकड़े गए व्यक्ति के छूटने पर ग्रामीण शांत हुए थे। इस मामले में वन अधिकारियों का कहना था कि ग्रामीण कोर जोन में आग जलाकर मवेशी चरा रहे थे जो कि गलत था, इसीलिए यह कार्रवाई की गई। उस समय तो मामला शांत हो गया था लेकिन थारू ग्रामीण खामोश नहीं हुए। उनकी ओर से एक महिला ने पुलिस को तहरीर दी गई कि डिप्टी डायरेक्टर समेत अन्य ने उसके साथ छेड़खानी और अभद्रता की। बाद में महिला की तहरीर पर करीब 19 दिन बाद पुलिस ने डिप्टी डायरेक्टर समेत अन्य के खिलाफ छेड़छाड़ और एससीएसटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की थी। उधर, रिपोर्ट दर्ज होने के बाद डीडी का कहना था कि तहरीर देने वाली महिला मौके पर मौजूद ही नहीं थी। उनके खिलाफ षड्यंत्र के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई। उन्होंने सभी आरोपों को निराधार बताया था। बाद में इस मामले की जांच सीओ पलिया ने जांच की और रिपोर्ट को झूठा मिलने का दावा करते हुए निरस्त कर दिया। सीओ ने बताया था कि डीडी पर लगाए गए सारे आरोप निराधार थे। पुलिस की इस कार्रवाई से ग्रामीण में रोष दिखा, इसी को देखते हुए विधायक रोमी साहनी ने रिपोर्ट निरस्तीकरण के कारणों को जानने लिए अधिकारियों से वार्ता करने की घोषणा की है। उनका कहना है कि कारण जाने जाएंगे उसके बाद ही आगे कोई कदम उठाया जाएगा।