लखीमपुर खीरी/बिजुआ। जिले में हर साल की तरह इस बार भी बाढ़ और कटान से बचाव के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। बाढ़ खंड ने विभिन्न स्थानों पर नए कटानरोधी कार्य कराने के साथ पुराने कार्यों की मरम्मत कराई। करीब 20 दिन पहले विभाग ने बाढ़ और कटान से बचाव की 12 परियोजनाओं का काम पूरा होने का दावा करते हुए जिला प्रशासन को रिपोर्ट भी सौंप दी, लेकिन शारदा और घाघरा का जलस्तर बढ़ते ही कई जगह बचाव कार्य प्रभावित होने लगे हैं।
धौरहरा तहसील में घाघरा किनारे सरैंया और भदई पुरवा में इस साल मरम्मत किए गए कटानरोधी कार्य जलस्तर बढ़ने पर क्षतिग्रस्त होते नजर आ रहे हैं। बिजुआ के तराई क्षेत्र में शारदा का जलस्तर बढ़ने से चिंता बढ़ गई है। बनबसा बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद रविवार शाम बझेड़ा तटबंध पर हल्का कटान शुरू हो गया। इसी साल तटबंध की मरम्मत कराई गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि तटबंध कमजोर पड़ने पर बझेड़ा, ढकिया खुर्द सहित आठ गांवों के लोगों पर संकट बढ़ जाएगा।
ग्रामीण प्रवीण कुमार, कपिल दत्ता, राजीव कुमार, राजकुमार और आकाश ने प्रशासन से तत्काल मरम्मत की मांग की है। कटान शुरू होने से ग्रामीणों में दहशत है, जबकि बाढ़ खंड के जिम्मेदार इसे मामूली दरार बता रहे हैं। एसडीएम युगांतर त्रिपाठी ने बताया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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बनबसा से छोड़ा 94,884 क्यूसेक पानी, शारदा का जलस्तर बढ़ा
धौरहरा। बनबसा बैराज से रविवार दोपहर करीब 94,884 क्यूसेक पानी छोड़े जाने से शारदा का जलस्तर बढ़ गया है। हालांकि, नदी खतरे के निशान से 44 सेंटीमीटर नीचे है। सेंट्रल वॉटर कमीशन (सीडब्ल्यूसी) के अनुसार, पलियाकलां (बेस) गेज स्टेशन पर दोपहर 12 बजे जलस्तर 154.18 मीटर रिकॉर्ड किया गया। प्रशासन ने निचले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इधर, घाघरा का जलस्तर बढ़ने के साथ जालिमनगर और हौकना मटेरा क्षेत्र में कटान तेज हो गया है। जालिमनगर पुल के पास वर्षों पुराना शिवालय नदी की जद में आ गया है। कटान से खेतों के साथ आबादी पर भी खतरा मंडरा रहा है। हौकना मटेरा क्षेत्र में वन विभाग की कुछ जमीन नदी में समा चुकी है। तहसीलदार आदित्य विशाल ने बताया कि बचाव कार्य के लिए रिपोर्ट अधीक्षण अभियंता बाढ़ खंड को भेजी गई है। तटबंध के अंदर होने से दिक्कत आ रही है। संवाद
धौरहरा के कई गांवों के खेतों की फसलें जलमग्न
धौरहरा। लगातार बारिश से ईसानगर के बेतीसहदेव, दुर्गापुर पड़री, चकदहा, चंदौली, कैरातीपुरवा, बेला गढ़ी, डुढ़की, भुरजनिया, नारीबेहड़, समदहा, जंगल सुजानपुर, स्वर्गलोक सहित 13 गांवों की फसलें जलमग्न हो गई हैं। तहसीलदार आदित्य विशाल ने बताया कि हल्का लेखपाल स्थिति पर नजर रखे हैं। गांवों के अंदर पानी नहीं है। निचले इलाकों के खेतों में फसलें डूबी हैं और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। संवाद
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ग्रंट नंबर-12 में फिर कटान तेज, स्कूल के सामने पहुंची शारदा
निघासन। शारदा का जलस्तर बढ़ने के साथ सोमवार को ग्रंट नंबर-12 गांव में फिर कटान तेज हो गया। उच्च प्राथमिक विद्यालय के सामने कटान शुरू हो गया और गांव का मुख्य संपर्क मार्ग भी इसकी जद में आकर टूट गया। सूचना पर राजस्व और पंचायत विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर कैंप कर स्थिति पर नजर रख रही है। प्रशासन ने ग्रामीणों से जोखिम न लेने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। संवाद
बिजुआ के कई गांवों पर बाढ़ का खतरा, चार राहत केंद्र सक्रिय
बिजुआ। शारदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से बिजुआ विकास खंड के कई गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। पानी कई स्थानों पर खेतों तक पहुंच गया है, हालांकि अभी आबादी में नहीं घुसा है। ब्लॉक में चार बाढ़ राहत केंद्र और तीन बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं। एक मॉडल राहत केंद्र भी तैयार किया जा रहा है।
बझेड़ा, करसौर, कोरियाना, रूरासुल्तानपुर, तनसुखपुरवा, बेलहासिकटिहा, डंबल-टांडा, रामनगर-कला, रेप्तीपुरवा, गुजारा, असाढ़ी और रामेश्वरापुर सहित कई गांव शारदा किनारे बसे होने से बाढ़ के खतरे में हैं। अधिकारियों को 24 घंटे सतर्क रहकर आपात स्थिति में तत्काल राहत-बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। गोला एसडीएम युगांतर त्रिपाठी ने बताया कि गांवों में हाई अलर्ट जारी है। छह लेखपाल और एक कानूनगो भ्रमण कर रहे हैं। संवाद
बोझवा में जीरो नंबर ठोकर तक पहुंचा पानी
पलियाकलां। बनबसा बैराज से छोड़े जा रहे पानी की मात्रा बढ़ने से शारदा किनारे बसे गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। भीरा थाना क्षेत्र के बोझवा गांव के पास जीरो नंबर ठोकर तक बाढ़ का पानी पहुंचने से ग्रामीण दहशत में हैं।
सोमवार सुबह आठ बजे बनबसा बैराज से 67,022 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जो आठ घंटे बाद शाम चार बजे बढ़कर 1,00,614 क्यूसेक हो गया। बढ़ते डिस्चार्ज से शारदा का जलस्तर बढ़ रहा है। बोझवा में किसानों को खेतों तक पहुंचने के लिए पानी से गुजरना पड़ रहा है। किसान जान जोखिम में डालकर साइकिलों पर हरा चारा लादकर पैदल पानी पार कर रहे हैं। संवाद
शारदानदी का बढ़ता जलस्तर।संवाद
शारदानदी का बढ़ता जलस्तर।संवाद
शारदानदी का बढ़ता जलस्तर।संवाद