पुलिया निर्माण के लिए डीएम ने दुधवा के डीडी को लिखा खत, दो साल से पार्क प्रशासन बन रहा रोड़ा
लखीमपुर खीरी। पलिया ब्लॉक में दुधवा से चंदनचौकी मार्ग के 10 किमी पर टूटी पुलिया का पुनर्निर्माण न होने से हादसे का डर बना हुआ है। दो साल पहले पुनर्निर्माण का कार्य दुधवा पार्क प्रशासन के आपत्ति लगाए जाने से अधर में लटका है, जिससे नेपाल बॉर्डर की चंदनचौकी समेत थारू जनजाति के करीब 25 गांव प्रभावित हैं। इस मामले का डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने संज्ञान लेते हुए पुलिया के पुनर्निर्माण और इस दौरान अस्थायी डायवर्जन मार्ग बनाने में जंगल की जमीन का अतिक्रमण न होने का आश्वासन देते हुए दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग पलिया के उपनिदेशक मनोज सोनकर को पत्र भेजा है।
जबकि शासन से पुलिया के पुनर्निर्माण की स्वीकृति मिलने के बाद पीडब्ल्यूडी विभाग निर्माण खंड की तीन टेंडर प्रक्रिया करा चुका है, जिसके बाद ठेकेदार मौके पर काम शुरू कराने गए थे। लेकिन दुधवा पार्क प्रशासन ने फॉरेस्ट कानूनों का हवाला देकर पुलिया का पुनर्निर्माण बंद कराकर उल्टे एक्सईएन से सड़क का निर्माण कब होने के संबंध में जानकारी मांगी थी। टूटी पुलिया पर मिट्टी की बोरियां डालकर किसी तरह आवागमन बहाल किया गया, लेकिन बारिश में आवागमन बाधित होने से चंदनचौकी समेत करीब 25 ग्राम सभाओं का संपर्क पलिया मुख्यालय से कट सकता है। तो वहीं हादसे होने की संभावना भी बढ़ जाएगी। पर्यटन के लिहाज से भी विपरीत असर पड़ेगा। अमर उजाला ने इस मामले को दो जनवरी 2020 के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन योगेंद्र सिंह ने पुलिया का पुनर्निर्माण न हो पाने के लिए दुधवा नेशनल पार्क के अधिकारियों को जिम्मेदार बताया था।
दुधवा-चंदनचौकी मार्ग पर प्रस्तावित पुलिया और डायवर्जन मार्ग खसरा/खतौनी में दर्ज सड़क की भूमि है। इसकी चौड़ाई 30 मीटर है, जिसके अंदर ही निर्माण कार्य किया जाएगा। इससे दुधवा पार्क प्रशासन को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। किसी प्रकार का कोई अतिक्रमण नहीं होगा। बारिश सीजन से पहले तत्काल पुलिया बनाया जाना जरूरी है, जिसके लिए उपनिदेशक दुधवा को पत्र लिखा है।
-शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम
पार्क एरिया में फॉरेस्ट कंजरवेशन एक्ट लागू है, जिससे पार्क क्षेत्र में पक्का निर्माण कार्य नहीं कराया जा सकता है। पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन से पूछा है कि यह सड़क कब बनाई गई, जिसका जवाब अब तक नहीं मिला है। 1980 से पहले सड़क बनी है, तो हम अपने स्तर से अनुमति दे देंगे। इसके बाद बनी है, तो शासन स्तर से अनुमति लेनी होगी।
-मनोज सोनकर, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क