अब बसपा से तीन मुस्लिम, दो ब्राह्मण उम्मीदवार, तीन महिलाओं में दो दलित, एक ओबीसी
बसपा ने कहीं सपा का खेल बिगाड़ा तो कहीं खड़ी की भाजपा के लिए चुनौती
लखीमपुर खीरी। बसपा ने सोशल इंजीनियरिंग का हुनर दिखाते हुए कहीं सपा का खेल बिगाड़ा तो कहीं भाजपा के लिए कड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। निघासन और मोहम्मदी में मुस्लिम उम्मीदवार उतार कर बसपा ने सपा की मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण की मंशा पर पानी फेर दिया है। भले ही इन दोनों सीटों पर बसपा खास फायदे में न रहे, लेकिन सपा के लिए मुश्किलें जरूर खड़ी कर दी हैं। इसी तरह कुछ सीटों पर बसपा ने भाजपा की चुनौतियां बढ़ाई हैं।
इस विधानसभा चुनाव में मुसलमानों का ज्यादा रुझान सपा की ओर दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटों का धुव्रीकरण सपा की ओर हो सकता है, लेकिन जहां दूसरे दलों के मजबूत मुस्लिम प्रत्याशी हैं वहां वे मुस्लिम वोटों में सेंध लगा सकते हैं। जिले की पलिया, निघासन और मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्रों में बसपा ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं।
श्रीनगर में बसपा ने नूर बानो को टिकट दिया है। नूर बानो पिछला चुनाव श्रीनगर क्षेत्र से ही सपा के टिकट पर लड़ चुकी है। जन्म से भले ही वह अनुसूचित जाति की रही हों, लेकिन अब वह मुस्लिम हैं। इसलिए वह भी सपा को ही नुकसान पहुंचाएंगी। बसपा ने गोला से शिखा वर्मा को टिकट दिया है। गोला से कांग्रेस उम्मीदवार प्रह्लाद पटेल भी कुर्मी बिरादरी से हैं, जबकि कस्ता से बसपा से हेमवती राज को उम्मीदवार बनाया है। हेमवती राज और सपा उम्मीदवार सुनील कुमार भार्गव दोनों पासी बिरादरी से हैं। ऐसे में हेमवती राज, सपा प्रत्याशी के सजातीय वोट बैंक में सेंध लगा कर समाजवादी पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।
मोहम्मदी, निघासन और पलिया में बसपा बिगाड़ सकती है सपा का खेल
मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र मुस्लिम बहुल माना जाता है। यहां करीब 90 हजार मुस्लिम वोटर हैं। यहां दाउद अहमद सपा के उम्मीदवार हैं। बसपा ने इनके मुकाबले पूर्व सांसद इलियास आजमी के बेटे शकील सिद्दीकी को चुनाव मैदान में उतारा है। शकील सिद्दीकी मुस्लिम वोटों में अच्छी सेंध लगाकर सपा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी तरह निघासन में सपा उम्मीदवार के खिलाफ भी बसपा ने मुस्लिम उम्मीदवार आरए उस्मानी को अपना उम्मीदवार बनाया है। आरएस कुशवाहा इसी विधानसभा क्षेत्र से बसपा के टिकट पर चुनाव जीत कर विधायक रह चुके हैं, जबकि बसपा उम्मीदवार आरए उस्मानी सपा के टिकट पर इसी क्षेत्र से एक बार चुनाव हार चुके हैं। आरए उस्मानी मुस्लिम वोटों में गहरी सेंध लगा सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो सपा की मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
यह एक संयोग ही है कि मोहम्मदी के सपा उम्मीदवार दाउद अहमद और निघासन के सपा प्रत्याशी आरएस कुशवाहा दोनों ही बसपा छोड़ कर सपा में शामिल हुए हैं। निघासन में बसपा प्रत्याशी आरए उस्मानी एक दिन पहले ही सपा छोड़कर बसपा में शामिल हुए थे। उधर पलिया में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे सपा उम्मीदवार प्रीतइंदर सिंह काकू के मुकाबले बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशी डॉ. जाकिर हुसैन को चुनाव मैदान में उतारा है। इससे पलिया में भी मुस्लिम ध्रुवीकरण की संभावनाओं को झटका लगा है। डॉ. जाकिर हुसैन मुस्लिम वोटों में सेंध लगाने के साथ-साथ दलित वोटों में भी गहरी सेंधमारी कर सकते हैं।
लखीमपुर और धौरहरा में बसपा बढ़ाएगी भाजपा की मुश्किलें
बसपा ने विधानसभा क्षेत्र लखीमपुर और धौरहरा में ब्राह्मण उम्मीदवारों को उतारकर भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। लखीमपुर विधानसभा क्षेत्र कुर्मी बहुल क्षेत्र होने के बावजूद ब्राह्मण मतदाता भी निर्णायक साबित होते रहे हैं। ब्राह्मणों का अधिक रुझान भाजपा की ओर ही दिख रहा है। ऐसे में लखीमपुर में बसपा प्रत्याशी मोहन बाजपेई और कांग्रेसे प्रत्याशी डॉ. रवि शंकर त्रिवेदी भाजपा उम्मीदवार योगेश वर्मा के खिलाफ मुश्किलें खड़ी करेंगे। यहां भाजपा और सपा ने कुर्मी उम्मीदवार जबकि बसपा और कांग्रेस दोनों ने ब्राह्मण उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। उधर धौरहरा में बसपा ने भाजपा उम्मीदवार विनोद शंकर अवस्थी के मुकाबले ब्राह्मण उम्मीदवार आनंद मोहन त्रिवेदी को चुनाव मैदान में उतार कर भाजपा के लिए चुनौती बढ़ा दी है।