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घर-घर सजीं जश्ने ईद ए मिलादुन्नबी की महफिलें

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मिलादे नूर किताब का विमोचन करते अंजुमन के लोग।
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खीरी टाउन। पैग़ंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की यौमे पैदाइश मंगलवार को अकीदत और एहतराम के साथ मनाई गई। सुबह से ही नारे तकबीर, अल्लाह हु अकबर की सदाएं बुलंद होने लगीं, सुन्नी इमामबाड़ा के मैदान में मीलाद शरीफ की महफ़िल सजाई गई। मीलाद शरीफ की शुरुआत हाफिज मो. वसी गौरी ने तिलावते कुरआन पाक से की। जलसे की निजामत करते हुए हाफिज कमर आलम ने हजरत मोहम्मद साहब के जीवन पर रोशनी डाली और उनके बताए हुआ रास्तों पर चलने की अपील की। इस मौके पर मिलादे नूर किताब का विमोचन किया गया। इस मौके पर हाजी अनीस, हाजी इफ्तिखार खान, हाजी आरिफ अली, अलाउद्दीन, असलम कुरैशी, इल्यास चिश्ती, हाफिज शोएब, पूर्व चेयरमैन गुफरान अहमद, मुन्ना, एहराज अरमान, अलाउद्दीन अंसारी, साइड खान आदि मौजूद रहे। कोविड 19 के चलते इस बार सामूहिक जुलूस नहीं निकाला गया।
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बारावफात पर घरों में सजीं मीलादुन्नबी के महफिलें
मैलानी। बारावफात के मौके पर यहां फज्र के वक्त से ही घरों में मीलादुन्नबी के महफिलें सज गईं और सुबह तक घरों में मीलाद और नात पढ़ी गईं। इसके बाद नियाज और तबर्रुक बांटा गया। बच्चों ने घरों पर ही अरबी ड्रेस और कुर्ता पायजामा आदि पहन कर बारावफात की खुशी का इजहार किया। मैलानी गांव स्थित जामा मस्जिद को बिजली की झालरों से सजाया गया। इसके अलावा घरों पर भी लोगों ने बिजली की झालरों, मोमबत्तियों और दीयों से रोशनी की। संवाद
मस्जिदों पर तैनात रही पुलिस और एसएसबी
पलियाकलां। मंगलवार को बारावफात का त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से मनाया गया। इस दौरान शहर की जामा मस्जिद, रजा मस्जिद, गौसिया मस्जिद, नूरी मस्जिद, मदीना आदि मस्जिदों पर पुलिस बल व एसएसबी के जवानों को तैनात किया गया था। इसके अलावा चौराहों व तिराहों पर भी पुलिस बल तैनात रहा ताकि कोई भी जुलूस आदि न निकाल सके। पुलिस ने एसएसबी जवानों के साथ पैदल मार्च भी किया। संवाद
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