जिले से कुल 10 मेडिकल छात्र-छात्राएं यूक्रेन में फंसे, घरों में पसरा सन्नाटा, छाई मायूसी
हर किसी को बस अपनों के लौट आने का इंतजार, तीन छात्रों के परिजन ने नहीं दी जानकारी
लखीमपुर खीरी। जिले के कुल 10 मेडिकल छात्रों के यूक्रेन में फंसे होने की जानकारी है, जिसमें सात परिवारों ने अपना दर्ज बांटते हुए सरकार से अपने बच्चों के सकुशल वतन वापसी की गुहार लगाई है, जबकि तीन परिवार ने जानकारी देने से इनकार कर दिया। उधर, अपने बच्चों के मुश्किल हालात में फंसे होने से परिजन मायूस हैं। उनके गले से निवाला तक नहीं उतर रहा है। बस वीडियो कॉल के जरिये ही वह अपने लाडलों का चेहरा देख पा रहे हैं, जिनमें से कुछ बेहद मुश्किल हालात में हैं तो कुछ सामान्य, लेकिन कमोबेश हर पीड़ित परिवार का दर्द एक सा है।
240 भारतीय छात्रों के साथ बंकर में फंसा हर्षित, पोलैंड की सीमा पर अनुराग
मोहम्मदी/पसगवां। तहसील क्षेत्र के दो सगे चचेरे भाई अनुराग और हर्षित यादव के यूक्रेन में फंसे होने की ख़बर से परिजन दहशत में हैं। मीडिया के जरिये यूक्रेन संकट की ख़बर मिलने के बाद से हर कोई बस दोनों के सकुशल घर लौटने की प्रार्थना कर रहा है। इसमें हर्षित 240 भारतीय छात्रों के साथ एक बंकर में छिपा हुआ है।
गांव मुर्तजाअली निवासी अरविंद यादव का पुत्र अरविंद यादव का पुत्र अनुराग यादव यूक्रेन की टरनोपिल नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस का छात्र है, जबकि भतीजा हर्षित उनके बड़े भाई अहिवरन यादव का पुत्र है जो कि खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी का छात्र है। अरविंद यादव ने बताया कि पुत्र अनुराग यादव पोलैंड की सीमा पर है और सामान्य स्थिति में है, लेकिन भतीजा हर्षित यादव मुश्किल में है।
बताया कि हर्षित 240 भारतीय छात्रों के साथ बेसमेंट में छुपा हुआ है। हर्षित यादव का परिवार मुर्तजा अली नगर में रहता है। दोनों छात्रों के फंसे होने से परिजन जहां भयभीत हैं, वहीं गांव में भी मायूसी है।
होली पर आने वाले थे घर, अब परिजन परेशान
पसगवां। परिजन ने बताया कि अनुराग और हर्षित होली पर घर आने वाले थे। इसके लिए फ्लाइट के टिकट बुक कराए जाने थे, लेकिन उससे पहले ही यह ख़बर आ गई, जिससे दोनों युवकों के माता-पिता काफी परेशान हैं और खबर मिलने के बाद से उनकी नींद गायब है और उनकी भूख भी खत्म हो गई है। वह बस अपने घर के दोनों चिरागों की वतन वापसी चाहते हैं।
पिता अरविंद यादव ने बताया कि अनुराग यूक्रेन में एमबीबीएस कर रहा है, जबकि एक पुत्र और दो पुत्रियां यहीं पढ़ रही हैं। अरविंद ने बताया कि वह और उनकी पत्नी काफी परेशान हैं। परिवार को तनाव से बचाने के लिये खुद धैर्य धारण कर रखा है। नींद नहीं आ रही है और भूख भी गायब हो गई है। पूरा दिन बस टीवी पर ही निगाहें लगी रहती है कि शायद कोई अच्छी ख़बर आ जाए, जबकि अहिवरन यादव का पुत्र हर्षित यूक्रेन में है तो छोटा बेटा मथुरा में पढ़ाई कर रहा है। दो पुत्रियां विवाहित हैं और तीसरी बेटी पढ़ाई कर रही है।
अहिवरन का कहना है कि वह खेती और एक निजी स्कूल में पढ़ाकर बच्चों को शिक्षित करवा रहे हैं, लेकिन युद्ध ग्रस्त क्षेत्र में घर के दो होनहारों के फंसने से बेहद परेशान हैं। परिवार बच्चों की याद में रोने लगता है। ऐसे में बस सरकार से यही उम्मीद है कि सभी भारतीय छात्रों को जल्द से जल्द घर लौटाने की व्यवस्था करे।
आलोक के घर में भी छाई मायूसी, बस वीडियो कॉल से मिल रही तसल्ली
मोहम्मदी। कोतवाली क्षेत्र के सेमराजानीपुर निवासी शिक्षक संतोष सिंह के बेटे आलोक सिंह के घर शुक्रवार को भी मायूसी छाई रही। हालांकि, वीडियो कॉल से अपने बेटे का चेहरा देखकर घर वालों को तसल्ली है। लेकिन, बीतते वक्त के साथ उनका धैर्य भी टूटता जा रहा है।
आलोक सिंह एक मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएम के छात्र हैं। वीडियो कॉल के जरिये उन्होंने अपनी सलामती की खबर दी है, लेकिन पास में बमबाजी हो रही है, जिससे परिजन परेशान हैं। पिता संतोष सिंह का कहना है कि सरकार की तरफ से जो हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। उन पर संपर्क नहीं हो पा रहा है। बताया कि आलोक चार साल से वहां पढ़ाई कर रहा था और 28 नवंबर को यहां से गया था। 22 फरवरी को आलोक के घर लौटने के लिये हवाई जहाज की टिकट भी बुक हो गया था, लेकिन यूक्रेन संकट की वजह से वह नहीं आ सका। संतोष बताते हैं कि वह शिक्षामित्र हैं और उनकी 23 फरवरी को चुनाव में ड्यूटी लगी थी। बेटे ने ही फोन कर घटना की सूचना दी थी, जिसके बाद से उनके होश उड़े हुए हैं। किसी तरह उन्होंने मतदान का काम पूर्ण करवाया और फिर जब घर लौटे तो पत्नी किरन सिंह का रो-रोकर बुरा हाल था। बताया कि दो रात से वह सोये नहीं हैं।
संतोष सिंह ने बताया कि बेटे की सलामती और सकुशल लौटने के लिये उन्होंने मन्नत भी मांगी है। शुक्रवार को उन्होंने महाभारत कालीन पालननात मंदिर पर जाकर पूजा अर्चना भी की है। संतोष के एक बेटा आलोक और एक पुत्री विजय लक्ष्मी है। संतोष सिंह ने बताया कि शुक्रवार को आलोक ने बताया है कि हॉस्टल के पास बमबारी हुई है। सभी लोग डरे और सहमे हुए हैं। इसके अलावा उसे मोहम्मदी से भी कई फोन जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने इस संबंध में किसी अधिकारी को सूचना नहीं दी है, लेकिन सरकार से गुहार लगाते हुए कहा है कि उनके बेटे समेत सभी छात्रों को सकुशल भारत वापस लाना चाहिये।
बेटी की चिंता में रात भर नहीं आई नींद, शुक्रवार को घर पर लगी भीड़
खीरी टाउन। बृहस्पतिवार को कस्बा निवासी उम्मी खातून के यूक्रेन में फंसने की जानकारी मिलने के बाद परिवार वालों को जहां रात भार नींद नहीं आई, वहीं शुक्रवार को उम्मी का हाल जानने के लिए उसके घर पर पड़ोसियों का आना जाना लगा रहा, जबकि परिजन वीडियो कॉल से लगातार उम्मी का हाल लेते रहे। उधर, उम्मी की सलामती के लिये नमाज के दौरान दुआएं भी मांगी गई।
शुक्रवार को उम्मी के भाई नौशाद, पिता निजाम अली और बड़ी बहन आसिया की परेशानी देखते हुए उनके रिश्तेदार व कस्बे के लोग सारा दिन उम्मी का हाल लेने के लिए उनके घर आते रहे। बड़ी बहन आसिया ने बताया की यूक्रेन में उसकी बहन पोलटावा स्टेट मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पांचवें वर्ष की छात्रा है। बृहस्पतिवार देर रात बात हुई थी तो बताया कि यूनिवर्सिटी के कई छात्र एंबेसी से जुड़े हुए हैं।
बकौल उम्मी, यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से बताया गया है कि हमले के बीच जैसे ही मौका मिलेगा तो छात्राओं को 1200 किलोमीटर दूर पोलैंड के बॉर्डर पर कैंप में भेजा जाएगा। वीडियो कॉल के जरिये उम्मी ने बताया कि बाजार बंद होने से खाने पीने की परेशानी हो रही है। प्रशासन भी लगातार बंकर में रहने को कह रहा है, जबकि पड़ोस में बमबाजी की आवाजें आती हैं। उधर, नेटवर्क न होने से परिजन के चेहरे पर मायूसी छा जाती है। उम्मी के पिता निजाम अली ने सरकार से अपील की है कि सरकार उनकी बेटी को सुरक्षित भारत लाने में मदद करे।
अनस के घर पर भी छाई मायूसी
खीरी टाउन। मोहल्ला डीहपुर निवासी कामिल हुसैन के पुत्र अनस यूक्रेन के पड़ोसी देश बेलारूस में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। यूक्रेन पर बमबाजी से परिजन परेशान हैं। कामिल ने बताया कि उनकी अनस से लगातार बात हो रही है। बेलारुस में कोई इमरजेंसी नहीं लगी है। बताया कि यूनिवर्सिटी के प्रशासन ने अनस से कहा है कि यूनिवर्सिटी की तरफ से सभी को अपने घर जाने की छूट दी गई है। कामिल ने बताया कि उन्होंने अपने पुत्र से हालात के मद्देनजर स्वदेश लौटने के लिये कहा है।
खजुरिया का एक छात्र भी यूक्रेन में फंसा, नहीं मिल रही मदद
पलिया/संपूर्णानगर। रूस व यूक्रेन में हो रहे युद्ध में पलिया तहसील के खजुरिया निवासी एक मेडिकल का छात्र भी फंस गया है। छात्र ने सोशल मीडिया पर अपनी वीडियो वायरल करते हुए भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है। छात्र ने वीडियो में कहा है कि भारतीय दूतावास से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन कोई मदद नहीं मिल रही है।
संपूर्णानगर थाना क्षेत्र के खजुरिया में कपड़े का व्यवसाय करने वाले बकरीदन अंसारी का पुत्र अब्दुल मन्नान अंसारी यूक्रेन में रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है और रूस-यूक्रेन के युद्ध में वह वहीं पर फंस गया है। यहां पर उसके पिता बकरीदन अंसारी ने बताया कि अब्दुल मन्नान पांच साल पहले यूक्रेन गया था और उसकी पढ़ाई लगभग पूरी होने वाली थी। बताया कि बेटे से बात हुई थी वह सुरक्षित है लेकिन कब क्या संकट वहां पर आ जाए कहना मुश्किल है, इसलिए पूरे परिवार के लोग परेशान हैैं। उधर, अब्दुल मन्नान ने अपना एक वीडियो जारी कर भारत सरकार से मदद करने की गुहार की है। उसका कहना है कि यहां के हालत काफी खराब हैैं, खाने पीने की चीजें मुश्किल से मिल रही है। हालांकि भारतीय दूतावास उनके संपर्क में है लेकिन वह कुछ कर नहीं पा रहा हैै। मन्नान ने भारत सरकार से उनको व उन जैसे अन्य छात्रों को यूक्रेन से जल्द से जल्द बाहर निकालने की गुहार लगाई है ताकि उनका जीवन सुरक्षित रह सके। खजुरिया में भी छात्र के सकुशल लौटने की कामना ग्रामीण कर रहे हैं।
अनुराग का परिवार।
आलोक का परिवार।
ऋषभ का परिवार।
अनस का परिवार।