बाघ की ड्रोन से निगरानी करते वनाधिकारी। स्रोत: विभाग
मझगईं। खालेपुरवा में कोकिला देवी और रामदीन की मौत के बाद बाघ को पकड़ने में जुटे वनकर्मियों को अब तक सफलता नहीं मिली है। बाघ की लोकेशन ट्रेस करने के लिए नौ कैमरे लगाए गए हैं और ड्रोन से निगरानी की जा रही है, लेकिन वह न कैमरों में कैद हो सका है और न ही ड्रोन की जद में आया है।
सोमवार को खैरा के पास मवेशियों के लिए चारा लेने गई 40 वर्षीय कोकिला देवी को बाघ ने मार डाला था। इससे पहले दुबहा गांव के पास रामदीन की भी जंगली हिंसक जानवर के हमले में मौत हो गई थी। तीन दिन के भीतर हुई दो घटनाओं से वन विभाग अलर्ट हो गया।
ग्रामीणों के हंगामे के बाद वन विभाग ने तीन बड़े पिंजरे लगाए, नौ कैमरे स्थापित किए और ड्रोन से निगरानी शुरू की। तीन दिन बाद भी बाघ की तस्वीर कैमरों में कैद नहीं हुई है। इससे ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है। लोग खेतों की ओर जाने से बच रहे हैं, जिससे गन्ने की फसल प्रभावित होने लगी है। वन विभाग को आशंका है कि बाघ शारदा नदी की ओर निकल गया है। वनकर्मी लगातार दिन-रात गश्त कर रहे हैं।
वन क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि नौ कैमरे लगाए गए हैं, लेकिन अभी तक लोकेशन ट्रेस नहीं हो सकी है। लगातार प्रयास जारी हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच राजमोहन ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) से बाघ को पकड़ने की अनुमति मिल चुकी है। वनकर्मियों और पशु चिकित्सकों की टीम उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही है।