- डीएम-सीडीओ से मिले प्रधान, कहा-एकांत स्थान पर बैठकर बनाई गई है सूची
- दोबारा गणना न होने पर आंदोलन और कोर्ट में जाने की चेतावनी दी
जिले में सामाजिक-आर्थिक गणना पर सवाल उठाते हुए ग्राम प्रधानों ने कहा है कि घर-घर न जाकर एक जगह पर एकांत बैठकर सूची तैयार कर ली गई है, जिसमें गरीबों को नहीं शामिल किया गया है, बल्कि सारे संसाधनों से परिपूर्ण लोगों को ही इस सूची में शामिल किया गया है। गणना के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई गई है। गणना करते समय इसकी जानकारी किसी व्यक्ति या ग्राम पंचायत के किसी प्रतिनिधि को नहीं दी गई और न ही ग्राम पंचायत की खुली बैठक में इसे पास कराया गया है। प्रधानों ने दोबारा गणना कराने की मांग करते हुए कहा कि अगर प्रशासन दोबारा गणना नहीं कराता है तो वे आंदोलन करेंगे और कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
बता दें कि अभी हाल में ही सभी ब्लाकों के ग्राम प्रधानों को उनके क्षेत्र की सूची थमाई गई है। इसी सूची के अनुसार लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना सहित कई योजनाओं का लाभ मिलना है। ग्राम पंचायत की सूची देखने के बाद प्रधान खासे परेशान हैं। डीएम, सीडीओ से मिलकर प्रधानों ने अपनी समस्याएं बताई और कहा कि वर्ष 2011 की गणना के दौरान सूची में काफी अनियमितता है। किसी से आपत्ति भी नहीं ली गई है। जिससे पात्र व्यक्ति छूट गए। जो परिवार वर्षों से अलग रहते हैं और वर्ष 2002 के सर्वे में भी उन्हें अलग दिखाया गया है, उनको भी इस सर्वे में संयुक्त परिवार दिखाकर एक व्यक्ति को मुखिया बना दिया गया। जिससे 2002 की तुलना में परिवारों की संख्या बढने के बजाए घट गई है। प्रधानों ने कहा कि सर्वे सूची के अवलोकन से पता चला है कि सैकड़ों की तादाद में गरीब परिवार छूटे हुए हैं। जबकि कई ऐसे परिवार हैं जिन्हें शासन द्वारा चलाई गई योजनाओं का लाभ मिल चुका है, उनका नाम भी इस सूची में शामिल किया गया है। प्रधानों ने मांग की कि है कि ग्राम पंचायत अधिकारी द्वारा यह सर्वे दोबारा कराया जाए, ताकि अपात्र नाम हटाए जा सकें और पात्र व्यक्तियों को लाभ मिल सके। इस दौरान प्रधान अछनिया अहलुनिशां, अमेठी प्रधान नुरुलनिशां, लोहिटी प्रधान विनोदनी देवी वर्मा, गुलचौरा प्रधान ऊषा सिंह, सुतेहरा प्रधान संजय वर्मा, करनपुर प्रधान विनोद पांडे समेत दर्जनों प्रधान मौजूद रहे।