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सावधान : ऑनलाइन लोन दिलाने के नाम पर ठग बनाते हैं लोगों को शिकार

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Beware: In the name of getting online loan, thugs make people a victim
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इस वर्ष साइबर सेल ने आठ लाख की कराई रिकवरी
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भूलकर भी अपने मोबाइल में डाउनलोड न करें ठगों की बताए एप
लखीमपुर खीरी। जनपद में जिस तरह ऑनलाइन कामकाज की गतिविधियों में वृद्घि हुई है, उसी तरह साइबर अपराध के मामले बढ़ रहे हैं। एंड्रायड/स्मार्टफोन का प्रयोग छोटे से छोटे गांवों तक होने लगा है। इससे साइबर अपराधी विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं के माध्यम से ग्रामीणों को ठगी का शिकार बनाते हैं।
जनपद के सभी थानों व कोतवाली में साइबर अपराधों की सुनवाई कर कार्रवाई के लिए साइबर हेल्प डेस्क बनाई गई हैं, जहां पर साइबर ठगी के मामलों की सुनवाई की जाती है। पुलिस लाइन में साइबर क्राइम सेल स्थापित है। इस वर्ष पांच माह के दौरान करीब दो दर्जन लोगों के साथ साइबर ठगी किए जाने के मामले सामने आ चुके हैं, जिनके बैंक खातों से करीब 12 लाख रुपये ठगों ने पार कर दिए। इसके बाद करीब 20 लोगों का आठ लाख रुपये वापस कराए गए हैं। शेष मामलों में भी कार्रवाई चल रही है।
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साइबर क्राइम सेल के एक सदस्य ने बताया कि सोशल साइट फेसबुक के जरिए कई तरह के फ्रॉड किए जा रहे हैं, जिसमें लड़कियों की फोटो लगाकर फेक आईडी बनाते हैं। फिर किसी भी टारगेट को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर उससे जुड़ जाते हैं और मैसेंजर पर चैटिंग के बहाने ठग पेटीएम या अन्य भुगतान माध्यमों से पैसा मांगते हैं। इसके अलावा मोबाइल के इनबॉक्स में आने वाले संदेश में बोनस प्राप्त करने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा जाता है, जिसे क्लिक करते ही वह व्यक्ति साइबर ठगों के निशाने पर आ जाता है। एनी डेस्क व टीम व्यूवर एप को तो किसी अनजान व्यक्ति या ठग के कहने पर भूल कर भी डाउनलोड न करें, क्योंकि ठग इन एप के जरिए किसी के भी मोबाइल या कंप्यूटर को पूरी तरह हैक करके बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। मौजूदा समय में ऑनलाइन लोन दिलाने के संदेश लोगों के मोबाइल पर भेजे जा रहे हैं, जिसमें दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही लोग साइबर ठग के चंगुल में फंस जाते हैं।
साइबर फ्रॉड की तुरंत हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज कराएं सूचना
साइबर क्राइम सेल में रिपोर्ट दर्ज करने की व्यवस्था नहीं है, जिससे अपने साथ हुए साइबर फ्रॉड की सूचना भारत सरकार के हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दर्ज करानी होगी। साथ ही साइबर क्राइम पोर्टल साइबरक्राइम डॉट जीओवी डॉट इन पर भी शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कराएं।
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सभी थानों और कोतवाली में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं, जहां पर साइबर अपराधों के मामलों की सुनवाई व कार्रवाई की जाती है। इसके अलावा पुलिस लाइंस में साइबर क्राइम सेल स्थापित है। जागरूकता से साइबर अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकता है, जिसके लिए समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को साइबर अपराध से बचने के संबंध में जानकारी दी जाती है।
- संजीव सुमन, एसपी
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