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लखीमपुर खीरी: तिकुनिया कांड में अंकित दास सहित 12 हत्यारोपियों की जमानत खारिज

Sat, 08 Jan 2022 12:04 AM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, लखीमपुर खीरी

सार

सीजेएम ने ध्यान दिलाया यह जमानत प्रार्थना पत्र प्रथम है या द्वितीय तब आरोपियों की ओर से बताया गया कि इससे पूर्व की धाराओं में जमानत प्रार्थना पत्र खारिज हुआ था।
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लखीमपुर खीरी हिंसा - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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लखीमपुर खीरी के तिकुनिया हिंसा में सीजेएम अदालत ने शुक्रवार को अंकित दास सहित 12 हत्यारोपियों की ओर से जमानत अर्जी खारिज कर दी। दो दिनों से स्थगित हो रही जमानत अर्जी शुक्रवार को आपत्तियों के निस्तारण के बाद सुनी गई। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामाशीष मिश्र और शैलेंद्र सिंह ग़ौड़ ने बदली गई धाराओं में दाखिल जमानत अर्जी पर बहस की। 

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बताया कि जमानत अर्जी देने वाले आरोपियों की कोई अन्य जमानत अर्जी किसी भी अदालत में लंबित नहीं है। जब सीजेएम ने ध्यान दिलाया यह जमानत प्रार्थना पत्र प्रथम है या द्वितीय तब आरोपियों की ओर से बताया गया कि इससे पूर्व की धाराओं में जमानत प्रार्थना पत्र खारिज हुआ था। बदली गई धाराओं में पहली अर्जी है, लेकिन वह इस जमानत प्रार्थना पत्र को प्रथम जमानत अर्जी नही लिख सकते हैं। यह कहते हुए जमानत अर्जी में द्वितीय जमानत आवेदन का उल्लेख किया साथ ही अभियुक्तों के पैरोकार की ओर से इसी बात का शपथ पत्र भी दाखिल किया और बताया कि एसआईटी की ओर से बिना सम्यक जांच किए ही उन्हें आरोपी बताया गया, जबकि वह निर्दोष हैं।

पांच आरोपियों के लिए दूसरे अधिवक्ता को भी दी गई नकल
तिकुनिया हिंसा में अदालती आदेश के बाद आखिरकार एसआईटी की ओर से केस डायरी से जुडे़ एक हजार पेज की नकल अंकित दास, सत्यम त्रिपाठी, नंदन सिंह बिश्ट, लतीफ उर्फ काले और शेखर भारती के अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह गौड़ को प्राप्त कराई गई। इतनी लंबी चार्जशीट से जुडे़ हजारों पेज की नकल प्राप्त करने के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह गौड़ ने बताया कि विस्तृत अध्ययन के बाद ही कुछ कहा जा सकता है कि एसआईटी ने कौन से महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नही दिया है। बताते हैं कि पूरी केस डायरी में कुल पांच हजार पेज नहीं हैं बल्कि इससे कम हैं। लेकिन अभियोजन की ओर से अंदाज से पांच हजार पेज की केस डायरी होने का कथन किया जा रहा है, जो स्वयं अभियोजन की कार्यशैली को बता रहा है।
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वीरेंद्र शुक्ल पर भेजे गए समन
चार्जशीट दाखिल होने के बाद सुर्खियों में आए ब्लॉक प्रमुख वीरेंद्र शुक्ल की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। उनके खिलाफ 201 आईपीसी के तहत दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने सम्मन जारी किया था। जो आला अधिकारियों के निर्देशन के चलते पुलिस ने तामील कराते हुए शुक्रवार को तामीला आख्या पत्रावली में दाखिल कर दी है, जिससे दस जनवरी की सुनवाई को लेकर सभी लोगों की निगाहें सीजेएम कोर्ट पर लगी हुई है।

दस जनवरी को बाकी अभियुक्तों को भी दी जा सकती है नकल
तिकुनिया हिंसा में सीजेएम चिताराम के आदेश पर बाकी बचे आरोपियों को भी नोकल देने के लिए एसआईटी ने नकल बनवानी शुरू कर दी है। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी एसपी यादव ने बताया कि इतनी विस्तृत केस डायरी होने के कारण ही चार्जशीट की नकलें बनवाने में कुछ विलंब हो रहा है लेकिन सुनवाई से पूर्व संबंधित अभियुक्त के अधिवक्ता को यथासंभव नकल दी जा सकती है। इसके लिए एसआईटी की ओर से अलग से टीम लगाई गई है। इस तरह कयास लगाए जा रहे है कि दस जनवरी को बाकी बचे सभी आरोपियों के अधिवक्ता को भी केस डायरी से जुड़ी कुछ नकल मिल सकती है। 

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