बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने गैंडा पुनर्वासन क्षेत्र में निगरानी और सैलानियों को जंगल भ्रमण कराने के लिए कर्नाटक से 12 हाथी दुधवा लाने की कवायद अधर में है। पिछले पांच साल से कर्नाटक सरकार से चल रहे पत्राचार का अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है।
दुधवा टाइगर रिजर्व में राजकीय हाथियों की फौज को बढ़ाने के लिए कर्नाटक के जंगलों से 12 हाथी दुधवा मंगाने के प्रयास करीब पांच साल पहले शुरू हुए थे। इसके लिए उप्र और कर्नाटक सरकार के बीच पत्राचार अभी तक चल रहा है। लेकिन नतीजा नहीं निकल सका है। इससे पहले 10 हाथी कर्नाटक से मंगाए गए थे, जो दुधवा में विभिन्न कार्यों में सेवारत हैं। इसके बाद 12 हाथी और मंगाने की योजना बनाई गई। लेकिन यह योजना अभी तक परवान नहीं चढ़ पाई है। यदि ये हाथी दुधवा में आ जाते हैं तो मानव-वन्यजीव संघर्ष के साथ- साथ वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के क्षेत्र में भी बेहतर ढ़ंग से कार्य हो सकता है।
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दुधवा में मौजूदा समय में हैं 25 राजकीय हाथी
दुधवा टाइगर रिजर्व में इन दिनों 25 राजकीय हाथी सेवारत हैं। इनका बाकायदा नामकरण भी किया गया हैं। इन हाथियों को प्रशिक्षण देकर मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने, वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए गश्त करने और सैलानियों को भ्रमण कराने में दक्ष किया गया है।
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कर्नाटक से वर्ष 2018 में आए थे 10 हाथी
दुधवा टाइगर रिजर्व में राजकीय हाथियाें की नस्ल सुधारने और जंगल की सुरक्षा के लिए पांच मई 2018 को 10 हाथी कर्नाटक से मंगाए गए थे। इनमें दो नर आठ मादा कुल 10 हाथी थे। इनमें 3 हाथी बच्चे थे,जो अब जवान होकर अन्य हाथियों के साथ कंधे रे कंधा मिलाकर वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा में मुस्तैद हैं। जो हाथी कर्नाटक से आए थे उनके नाम भास्कर और नकुल नर,टेरेसा,अमृता,काबिनी,कावेरी,किरन, पार्वती, डायना और तुंगा (मृतक ) मादा हाथी दुधवा लाए गए थे।
वर्जन
दुधवा में 12 हाथियों को मंगाने के लिए कर्नाटक सरकार से लगातार पत्राचार जारी है। जल्दी ही दुधवा को 12 हाथी और मिलने की उम्मीद है।
- डॉ. एच राजामोहन,एफडी,दुधवा टाइगर रिजर्व