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बकाया गन्ना भुगतान ने पहले तोड़ी कमर, अब बाढ़ और बारिश ने किया तबाह, कैसे मने दिवाली

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लखीमपुर खीरी। बकाया गन्ना भुगतान न मिलने से परेशान खीरी के किसानों को अब बाढ़ और बारिश ने तबाह कर दिया है। किसानों का कहना है कि उनका तो दिवाला निकल रहा है। दिवाली वह कैसे मनाएं।
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जनपद में पेराई सत्र 2020-21 में चीनी मिलों ने कुल 1015 लाख क्विंटल गन्ने की आपूर्ति ली। चीनी मिलों पर किसानों का 8 अरब 84 करोड़ 76 लाख रुपया बकाया है, जो न मिलने पर वह परेशान हैं। भुगतान न मिलने पर किसानों की दैनिक जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं। उधर, बारिश और बाढ़ ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। किसानों की धान की फसल डूबी पड़ी है, जिसे बचाने के चक्कर में कई किसान अपनी जान गंवा चुके हैं। बाढ़ से 40 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि प्रभावित हुई है, जिसमें किसानों की फसलें उगी थीं। जिसमें फसलों के नुकसान का 16842 लाख रुपया का अनुमान लगाया गया है।
उधर, सरकारी धान खरीद केंद्र उसके हालात का मखौल उड़ा रहे हैं। किसानों का धान नहीं खरीदा जा रहा है। क्रय केंद्र प्रभारी किसानों को गुमराह कर रहे हैं। मजबूरन किसान अपना धान और गन्ना औने पौने दामों में बेचने को मजबूर है।
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62 हजार किसान करते हैं बजाज को गन्ना सप्लाई
गोला गोकर्णनाथ। क्षेत्र का 62 हजार 193 किसान बजाज चीनी मिल में गन्ना आपूर्ति करता है। पिछले पेराई सत्र में बजाज चीनी मिल ने 198.22 लाख क्विंटल गन्ना खरीदा था। बजाज चीनी मिल गोला ने अब तक महज 194.77 करोड़ भुगतान ही किया है, जबकि मिल नया पेराई सत्र शुरू होने को है। अब भी गन्ना किसानों का 315.35 करोड़ रुपये भुगतान का बकाया है। कई धरना प्रदर्शन, गन्ना विकास समिति द्वारा बार-बार नोटिस जारी करने के बाद भी बजाज चीनी मिल ने कार्रवाई नहीं की। किसानों का कहना है कि बकाया भुगतान न मिला तो दीपावली पर भी किसान कंगाली से जूझता रह जाएगा। संवाद
संसारपुर निवासी सियाराम दीक्षित का कहना है कि सात पर्चियों में से दो पर्चियों का 26 हजार भुगतान हुआ है, जबकि पांच पर्चियों का एक लाख 30 हजार रुपया बकाया है और दिवाली करीब है।
रोशननगर के धर्मेंद्र कुमार का कहना है कि ट्रॉली की तीन पर्ची बेची थीं। एक पर्ची का भुगतान मिला है। भुगतान न मिलने से रबी फसल की बुवाई कैसे होगी, यही चिंता सता रही है।
खोखाय के दिनेश शर्मा का कहना है कि पुराने सत्र में उन्होंने 26 ट्रॉली गन्ना गोला मिल को भेजा था, जिसमें सिर्फ 20 ट्रॉली का भुगतान बकाया है। जिससे आर्थिक संकट खड़ा हो गया है, ऐसे में दिवाली कैसे मने।
सुंदरपुर के प्रगतिशील किसान रामकुमार वर्मा का कहना है कि उन्होंने 35 ट्रॉली गन्ना भेजा था, लेकिन अब तक एक भी पर्ची का भुगतान नहीं हुआ हैै। सर पर दिवाली है पर हाथ में पैसा नहीं है।
ममरी के किसान विनोद वर्मा का कहना है कि उन्होंने सात पर्ची गन्ना मिल को सप्लाई किया था, जिसमें 6 पर्ची का भुगतान अब तक नहीं हो पाया है। बताया कि आर्थिक तंगी की वजह से वह कोल्हू पर गन्ना बेचने आए हैं।
जनकपुर नंबर 18 के किसान संजय यादव का कहना है कि उन्होंने पुराने सत्र में 12 ट्रॉली मिल को सप्लाई किया था। मगर, अब तक सात ट्रॉली का भुगतान नहीं मिला है। ऐसे में दिवाली कैसे मनेगी, वह क्या कहें।
दिवाली से पहले बाढ़ ने निकाला दीवाला
पलिया। पलिया के मटैहिया ग्राम पंचायत के बोझवा गांव निवासी महेश कश्यप ने बताया कि शारदा नदी की बाढ़ में उनकी करीब चार एकड़ धान की फसल बर्बाद हो गई है, जिससे उन्हें काफी नुकसान हुआ है। पहले से ही कर्ज लेकर फसल बोई थी अब और कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
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पलिया के मटैहिया गांव निवासी रामकुमार गुप्ता ने बताया कि दिवाली से पहले ही शारदा नदी की बाढ़ ने दीवाला निकाल दिया। बाढ़ से करीब दो एकड़ धान की फसल बर्बाद हो गई। उम्मीद थी कि धान की फसल बेचकर कर्ज उतारने के साथ ही दीपावली बढ़िया ढंग से मनाएंगे, लेकिन सब बेकार हो गया।
सरकार सिर्फ वादे कर निकाल रही किसानों का दीवाला
बजाज ग्रुप की तीनों चीनी मिलों ने बीते सत्र का गन्ना खरीदे और अभी पेराई किए गए गन्ने की कुल धनराशि का मात्र 30 प्रतिशत बकाया ही भुगतान किया है। अब भी अरबों रुपये बकाया है, जबकि किसान की जेब खाली है। वह कंगाली में दिवाली कैसे मनाएगा। सरकार सिर्फ वादे कर किसानों का दीवाला निकाल रही है।
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- पटेल श्रीकृष्ण वर्मा, जिलाध्यक्ष, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन
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