लखीमपुर खीरी। तिकुनिया हिंसा में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे व मुख्य आरोपी आशीष मिश्र मोनू को बृहस्पतिवार को लखनऊ हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। जमानत आदेश अब जिला अदालत में पेश किया जाएगा। इसके बाद आशीष मिश्र को जेल से रिहा किया जा सकता है। मामले में हिंसा के तीन महीने के अंदर एसआईटी ने आशीष मिश्र समेत 13 आरोपियों को सोच समझकर की गई हत्या का आरोपी बनाते हुए चार्जशीट दाखिल की थी।
करीब तीन महीने तक चली जांच में एसआईटी ने तीन जनवरी को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र के बेटे आशीष मिश्र को मुख्य आरोपी बनाते हुए सभी 13 आरोपियों को भी मुल्जिम माना था। आरोप पत्र में पुलिस ने मंत्री टेनी के रिश्तेदार वीरेंद्र शुक्ला को भी आरोपी बनाया था। उन पर सुबूत मिटाने व पुलिस को झूठी सूचना देने का आरोप है। हालांकि बाद में उनको जमानत मिल गई। अब तक मामले में आशीष मिश्र समेत 13 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी, जो अभी जेल में हैं।
एसआईटी ने विवेचना और साक्ष्य संकलन के आधार मुख्य आरोपी आशीष मिश्र उर्फ मोनू, अंकित दास, नंदन सिंह बिष्ट, सत्य त्रिपाठी, लतीफ उर्फ काले, शेखर भारती, सुमित जायसवाल, आशीष पांडेय, लवकुश, शिशुपाल, उल्लास कुमार त्रिवेदी उर्फ मोहित त्रिवेदी, रिंकू राना, धर्मेंद्र कुमार बंजारा ने तिकुनिया हिंसा को सोची समझी साजिश के तहत अंजाम दिया था। इन सभी 13 आरोपियों के खिलाफ सोची समझी साजिश के तहत हत्या, हत्या का प्रयास, अंग भंग करना, अवैध रूप से शस्त्र रखना और आर्म्स एक्ट के अपराध प्रमाणित हुए थे। इसलिए इन पर 147/148/149/307/326/34/427/120बी/ और आर्म्स एक्ट की धारा 3/25/30 सभी 13 आरोपियों पर लगाई गई थीं।
एसआईटी ने आशीष मिश्र मोनू को माना था मुख्य आरोपी
तिकुनिया हिंसा में एसआईटी ने 5000 पेज के विस्तृत आरोपपत्र में 208 व्यक्तियों के मौखिक गवाह कराए थे। एसआईटी ने आशीष मिश्र मोनू को साजिश रचते हुए अपने साथ 12 आरोपियों को शामिल करते हुए हिंसा का ताना बाना रचने का दोषी पाया था। आरोप पत्र के मुताबिक आशीष मिश्र की घटनास्थल पर न होने की दलील झूठी पाई गई थी। एसआईटी ने घटनास्थल से 100 मीटर की दूरी पर लगे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उनकी ये दलील खारिज कर दी थी। एसआईटी की माने तो दंगल में शामिल होने के लिए आ रहे अंकित दास और उनके ड्राइवर लतीफ और काले ने लखनऊ से ही असलहे जुटाना शुरू कर दिए थे। सीतापुर में अपने साथियों को भी डाल कर सीधे तिकुनिया दंगल स्थल पर पहुंच गए, वहीं साजिश रचते हुए इस वीभत्स कांड को अंजाम दिया।